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वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने की आखिरी तारीख आज, आधा भी नहीं हुआ काम; अब क्या होगा?

वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने की आखिरी तारीख आज, आधा भी नहीं हुआ काम; अब क्या होगा?

संक्षेप:

वक्फ संशोधन अधिनियम के तहत पंजीकरण की अवधि कानून में निश्चित है, इसलिए केंद्र ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- मैं एक्ट बदले बिना तारीख नहीं बदल सकता।

Dec 05, 2025 07:33 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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देशभर में फैली लगभग 8.8 लाख वक्फ संपत्तियों के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा 6 जून को लॉन्च किए गए ‘UMMEED’ पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। डेडलाइन से एक दिन पहले भी सबसे अधिक वक्फ संपत्तियों वाले राज्यों- उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु में सिर्फ 10 से 35 फीसदी संपत्तियां ही पोर्टल पर दर्ज हो पाई हैं।

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इसके मुकाबले पंजाब ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां लगभग 80% वक्फ संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं। हालांकि, पंजाब में वक्फ संपत्तियों की बजाय वक्फ एस्टेट्स पंजीकृत किए जा रहे हैं। यानी एक एस्टेट में कई संपत्तियां शामिल हो सकती हैं इसलिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रही।

राज्यवार स्थिति और चुनौतियां

उत्तर प्रदेश- सर्वाधिक वक्फ संपत्तियां, अपलोड केवल 35%

  • देश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं- कुल 1.4 लाख।
  • सुन्नी वक्फ बोर्ड: 1.26 लाख में से 36% (45,574) संपत्तियां अपलोड
  • शिया वक्फ बोर्ड: 15,386 में से 18.9% (2,909) संपत्तियां अपलोड

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि कई संपत्तियां सदियों पुरानी हैं, जिनके मूल दस्तावेज अनुपलब्ध हैं। एक अधिकारी ने कहा कि 20वीं सदी की शुरुआत में दर्ज किए गए वक्फ के कागज आखिर कहां से मिलेंगे? राजस्व रिकॉर्ड में यह वक्फ के रूप में दर्ज हैं, लेकिन पोर्टल दाखिल खारिज या रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज मांग रहा है। बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी ने भी स्वीकार किया कि डेडलाइन से पहले पंजीकरण पूरा करना संभव नहीं है। बता दें कि बिहार UP के अलावा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां सुन्नी और शिया बोर्ड अलग-अलग हैं, बाकी सभी राज्यों में एक ही वक्फ बोर्ड है।

पश्चिम बंगाल- 12% पंजीकरण, तकनीकी और भाषाई दिक्कतें

पश्चिम बंगाल की कुल 80480 वक्फ संपत्तियों में से सिर्फ 10000 यानी 12 फीसदी ही पंजीकृत हैं।

मुख्य कारण:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में मुतवल्ली तकनीकी जानकारी से वंचित हैं।
  • पोर्टल केवल अंग्रेजी में है, जबकि अधिकांश मुतवल्ली अंग्रेजी नहीं जानते।
  • भूमि माप इकाइयों में अंतर है। एक बीघा बंगाल में अलग, बिहार-UP में अलग।

TMC सरकार ने कई महीनों तक वक्फ संशोधन अधिनियम लागू करने से इनकार किया था, बाद में प्रशासन ने अपलोडिंग शुरू कराई।

कर्नाटक- 10% पंजीकरण, सर्वर बार-बार क्रैश

  • 65242 वक्फ संपत्तियों में से सिर्फ 6000 अपलोड हुई हैं।
  • अधिकारियों के अनुसार: पोर्टल अक्सर क्रैश हो जाता है। एक संपत्ति को अपलोड करने में 10-15 मिनट लगते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को कुछ करना चाहिए।

पंजाब- 80% पंजीकरण, अलग मॉडल की वजह से रफ्तार

  • कुल 25,000 वक्फ एस्टेट्स में से 20,000 पंजीकृत।

कारण:

  • यहां मुतवल्ली नहीं- सभी संपत्तियां बोर्ड सीधे प्रबंधन करता है।
  • संपत्ति नहीं, सिर्फ एस्टेट्स अपलोड की जा रहीं, जो आसान है।

तमिलनाडु - 10% पंजीकरण, दस्तावेज अस्पष्ट

66092 संपत्तियों में से लगभग 6,000 अपलोड की गई हैं। TN वक्फ बोर्ड चेयरमैन नवास कानी ने कहा: अधिकांश मुतवल्ली को तकनीकी सहयोग नहीं मिला। कई संपत्तियों के दस्तावेज अस्पष्ट या अधूरे हैं। सरकार द्वारा भूमि सर्वे पूरा किए बिना सटीक रिकॉर्ड तैयार करना कठिन है।

केंद्र सरकार की स्थिति और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

वक्फ़ संशोधन अधिनियम के तहत पंजीकरण की अवधि कानून में निश्चित है, इसलिए केंद्र ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- मैं एक्ट बदले बिना तारीख नहीं बदल सकता। विशेष परिस्थितियों में वक्फ ट्रिब्यूनल ही समय बढ़ा सकते हैं।

सांसदों और संगठनों की मांग

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि UP की 70% संपत्तियां पंजीकृत नहीं… सर्वर डाउन है… ऐसा लगता है जैसे धार्मिक अधिकार समाप्त हो गए हों। वहीं कांग्रेस MP इमरान मसूद ने कहा कि तकनीकी समस्याओं के कारण मुसलमान चिंतित हैं।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

SC ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया है। इसने कहा कि वक्फ ट्रिब्यूनल में जाएं, वही राहत दे सकते हैं। अब डेडलाइन पूरी न कर पाने की स्थिति में बोर्ड और मुतवल्ली राज्य के वक्फ ट्रिब्यूनल में जाकर कारण बता सकते हैं। यह बोर्ड विस्तार दे सकते हैं। लेकिन बोर्डों की चिंता है। उनका मानना है कि हजारों आवेदन आने पर ट्रिब्यूनल कैसे संभालेंगे?

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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