Ladki Bahin Yojana: 80 लाख महिलाओं के नाम कटे, अब नहीं बढ़ेगी e-KYC की तारीख; जानें क्या है वजह

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सूची से 80 लाख नामों का कम होना अपात्र आवेदकों को बाहर निकालने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया का परिणाम है। अधिकारियों ने नाम हटाए जाने के पीछे कई कारण बताए हैं।

Ladki Bahin Yojana: 80 लाख महिलाओं के नाम कटे, अब नहीं बढ़ेगी e-KYC की तारीख; जानें क्या है वजह

महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना के भविष्य को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह योजना आगे भी जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल e-KYC की समयसीमा को आगे बढ़ाने या नए लाभार्थियों को जोड़ने की कोई योजना नहीं है। सरकार द्वारा चलाए गए एक सत्यापन अभियान के बाद लाभार्थियों की सूची में 80 लाख नाम काट दिए गए हैं। योजना के शुरुआती दौर में लाभार्थियों की संख्या 2.46 करोड़ थी, जो अब घटकर 1.66 करोड़ रह गई है।

दस्तावेजों के सत्यापन और अपात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए चलाई गई e-KYC मुहिम 30 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है। जिन महिलाओं की e-KYC अधूरी रह गई थी, उनकी अपीलों के बावजूद सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तारीख को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सरकार के पास e-KYC की समयसीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। लाभार्थियों को इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। इसके अलावा वर्तमान में नए लाभार्थियों को जोड़ने का भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।"

क्यों कटे 80 लाख महिलाओं के नाम?

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सूची से 80 लाख नामों का कम होना अपात्र आवेदकों को बाहर निकालने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया का परिणाम है। अधिकारियों ने नाम हटाए जाने के पीछे कई कारण बताए हैं। तय समयसीमा तक e-KYC पूरा न करना या रिकॉर्ड अपडेट न कर पाना, दस्तावेजों का अधूरा या गलत होना, योजना की तय पात्रता और आय मानदंडों को पूरा न कर पाना और व्यक्तिगत जानकारी में गड़बड़ी होना। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने नवंबर 2025 से दस्तावेज अपडेट करने की समयसीमा को कई बार बढ़ाया था और 30 अप्रैल को अंतिम तारीख घोषित किया गया था।

महिलाओं में नाराजगी

सूची से नाम हटाए जाने के कारण प्रभावित महिलाओं को बड़ा वित्तीय झटका लगा है। पुणे जिले की रहने वाली माया वाघमारे ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा, "मैंने अपने दस्तावेज जमा किए थे और मुझे आश्वासन दिया गया था कि सिस्टम अपडेट हो जाएगा। लेकिन मेरा नाम ही हटा दिया गया। वह मासिक सहायता मेरे घर के खर्चों के लिए बहुत जरूरी थी।"

एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि कई महिलाओं को लग रहा था कि सरकार पहले की तरह इस बार भी तारीख आगे बढ़ा देगी। इस लापरवाही के कारण अब उनकी मासिक किस्तें अचानक रुक गई हैं।

विपक्ष के आरोपों पर सरकार की सफाई

यह स्पष्टीकरण उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम के उन आश्वासनों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज कर दिया था कि इस योजना को बंद कर दिया जाएगा। शिंदे ने हाल ही में दोहराया कि सरकार महिलाओं और किसानों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और इस पहल के बजट में कोई कटौती नहीं की जाएगी।

साल 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई 'लाड़की बहिन योजना' के तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जाती है। महायुति सरकार की इस बेहद महत्वपूर्ण योजना से राज्य के खजाने पर सालाना 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ आता है।

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Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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