तिरुपति में पूरे 5 साल तक बनते रहे मिलावटी घी के लड्डू, खर्च हुए थे 250 करोड़

तिरुपति में पूरे 5 साल तक बनते रहे मिलावटी घी के लड्डू, खर्च हुए थे 250 करोड़

संक्षेप:

तिरुपति में मिलावटी घी से बने लड्डू के मामले में एसआईटी ने कई खुलासे किए हैं। एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच साल तक मिलावटी घी से ही लड्डू बनते रहे और केवल घी खरीदने में 250 करोड़ रुपये के लगभग खर्च किए गए।

Nov 11, 2025 11:07 am ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
share

तिरुपति में 'चर्बी वाले घी' से बने लड्डू प्रसाद को लेकर एसआईटी ने बड़ा खुलासा किया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पांच साल तक मिलावटी घी के लड्डू की सप्लाई होती रही। इस बीच करीब 60 लाख किलोग्राम लड्डू तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को भेजे गए जिनकी कीमत 250 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

एसआईटी ने बताया है कि पांच साल तक उत्तराखंड की एक डेयरी से करीब 68 लाख किलो नकली घी खरीदा गया। इस डेयरी का नाम 'भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी' था। इसी डेयरी से 2019 से 2024 तक घी की सप्लाई होती थी। वहीं डेयरी ने कभी दूध या मक्खन नहीं खरीदा। वह रासायनिक पदार्धों जैसे कि मोनोडाईग्लिसराइड्स और एसिटिक एसिड एस्टर का इस्तेमाल करके कृत्रिम घी तैयार करती थी।

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड के भगवानपुर में पोमिल जैन और विपिन जैन ने यह नकली घी की फैक्ट्री लगाई थी। इसने दूध खरीदने के फर्जी रिकॉर्ड तैयार किया। 2022 में इस डेयरी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इसके बाद भी दूसरी डेयरी के माध्यम से इसका नकली घी बिकता रहा और टीटीडी को भी सप्लाई होता रहा।

50 लाख की रिश्वतखोरी भी आई सामने

इस मामले में 50 लाख की रिश्वतखोरी की भी बात सामने आई है। आरोप है कि मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन रहे वाईवी सुब्बा रेड्डी के पीए चिन्नाप्पन्ना को रिश्वत दी गई थी। उस समय सुब्बा रेड्डी लोकसभा में सांसद थे। फिलहाल वह राज्यसभा सांसद हैं। जानकारी के मुताबिक यूपी की एग्री फूड्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरफ से उन्हें 50 लाख रुपये कैश दिया गया था।

पिछले साल इस मामले पर खूब विवाद हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की पुलिस, सीबीआई और फूड सेफ्टी अधिकारियो को मिलाकर एसआईटी बना दी थी। जांच में बताया गया कि घी सप्लाई करने में चार कंपनियां शामिल थीं। टेंडर हासिल करने के लिए कीमत बदली गई और कई फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। भोले बाबा ऑर्गनिक डेयरी में घी तैयार करने के लिए पाम ऑइल और रसायन का इस्तेमाल किया जाता था।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।