Hindi NewsIndia NewsKiran Mazumdar Shaw Offers To Fund Bengaluru Road Repair, P Chidambaram Responds advices two states
प्रॉब्लम पैसे की नहीं, बल्कि... बेंगलुरु की सड़कें बनाने के किरण शॉ के ऑफर पर चिदंबरम की क्या नसीहत

प्रॉब्लम पैसे की नहीं, बल्कि... बेंगलुरु की सड़कें बनाने के किरण शॉ के ऑफर पर चिदंबरम की क्या नसीहत

संक्षेप:

चिदंबरम ने लिखा कि सरकार शॉ के विचार पर अपनी नीति में बदलाव कर सकती है। ठेकेदारों का चयन करने के बाद उन्हें शॉ जैसी किसी इच्छुक कंपनी या उद्योगपति की देखरेख में सौंपा जा सकता है, जो सार्वजनिक सड़कों की देखरेख करेगा।

Wed, 22 Oct 2025 02:15 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने बायोकॉन की अध्यक्ष किरण मजूमदार-शॉ द्वारा बेंगलुरु में सड़कों की मरम्मत के लिए धन मुहैया कराने की पेशकश का स्वागत किया है। हालांकि, चिदंबरम ने कहा कि समस्या धन की कमी नहीं है; बल्कि समस्या सार्वजनिक कार्यों के क्रियान्वयन की है। लगे हाथ चिदंबरम ने दो सरकारों को बड़ी नसीहत दी है। राज्यसभा सांसद की यह टिप्पणी तब आई है, जब कुछ दिनों पहले बेंगलुरु की सड़कों पर गड्ढे के मुद्दे पर किरण मजूमदार शॉ और राज्य के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सोशल मीडिया पर ऑनलाइन तीखी तकरार हुई थी।

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चिदंबरम ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "मैंने किरण मजूमदार शॉ द्वारा बेंगलुरु में कुछ सड़कों की मरम्मत के लिए धन मुहैया कराने की पेशकश को दिलचस्पी से देखा है। एक शानदार पेशकश! बधाई! लेकिन हमारे सार्वजनिक कार्यों में समस्या सार्वजनिक धन की कमी नहीं है; समस्या सार्वजनिक कार्यों के क्रियान्वयन में है।" चिदंबरम ने इस समस्या के समाधान के लिए एक नई प्रणाली का सुझाव भी दिया जिसमें शॉ जैसे किसी उद्योगपति या किसी कंपनी को सुपरविजन की जवाबदेही दी जाए।

सरकार को नीति में बदलाव लाने की सलाह

चिदंबरम ने लिखा, "सरकार शॉ के विचार पर नीति में बदलाव कर सकती हैं: ठेकेदार के चयन के लिए सार्वजनिक धन, निविदा आदि का उपयोग कर ठेकेदार के चयन के बाद, उसे शॉ जैसी किसी इच्छुक उद्योगपति या कंपनी की देखरेख में रखा जा सकता है।" उन्होंने सुझाव दिया कि परियोजना की देखरेख करने वाली कंपनी या उद्योगपति इसके क्रियान्वयन के लिए जवाबदेह होंगे; इसमें किसी भी जुर्माने या लागत में वृद्धि का भार वहन करना भी शामिल हो सकता है।

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राज्यसभा सांसद ने कहा, "ठेकेदार सार्वजनिक कार्य (जैसे, सड़क) का निर्माण करेगा। हालाँकि, पर्यवेक्षण करने वाली कंपनी या उद्योगपति कार्य की गुणवत्ता और समय पर क्रियान्वयन के लिए ज़िम्मेदार होगा। किसी भी जुर्माने या लागत में वृद्धि का भार सुपरविजन करने वाली कंपनी या उद्योगपति द्वारा वहन किया जाएगा।" चिदंबरम ने सुझाव दिया कि इस आइडिया का प्रयोग करना चेन्नई या बेंगलुरु उपयुक्त जगह होगी।

शॉ और शिवकुमार के बीच हुई थी ऑनलाइन भिड़ंत

बता दें कि भारतीय उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों में से एक शॉ ने भी बेंगलुरु की सड़कों की दुर्दशा के लिए कर्नाटक सरकार की आलोचना की थी। पिछले हफ़्ते उनकी ऑनलाइन पोस्ट ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की नाराज़गी को जन्म दिया था। उनकी पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए बेंगलुरु के विकास का प्रभार संभालने वाले उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा था कि वह अपनी जड़ों को भूल गई हैं। उन्होंने शॉ पर "निजी एजेंडा" चलाने का भी आरोप लगाया था, जिसका शॉ ने खंडन किया था।

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शॉ ने कसा था तंज

रिपोर्टों से पता चलता है कि शॉ ने तब बेंगलुरु की सड़कों की मरम्मति के लिए धन देने की भी पेशकश की थी। शॉ ने तंज कसते हुए कहा था कि अगर सरकार गड्ढों को ठीक नहीं कर सकती, तो वह खुद 10 सड़कें बनवा देंगी। उपमुख्यमंत्री शॉ के इस विचार से सहमत नहीं थे। हालांकि, उन्होंने कहा था कि सरकार उनकी इच्छानुसार सड़कों के निर्माण में सहयोग करेगी। इस ऑनलाइन विवाद के बाद मंगलवार को शॉ ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार से उनके घर पर जाकर मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान कथित तौर पर उन्होंने अपने भतीजे की शादी में आमंत्रित किया है। बाद में डीके शिवकुमार ने एक पोस्ट में लिखा कि शॉ से बेंगलुरु के विकास, नवाचार और कर्नाटक की विकास यात्रा के आगे के रास्ते पर चर्चा हुई।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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