इजरायली एयर स्ट्राइक में खामेनेई की मौत, कौन बनेगा ईरान का अगला सुप्रीम लीडर?
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि खामेनेई हमारी खुफिया जानकारी और ट्रैकिंग सिस्टम से बचने में पूरी तरह विफल रहे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान पर सटीक और भारी बमबारी का सिलसिला अभी रुका नहीं है।

मध्य पूर्व की राजनीति को हिला देने वाली एक बड़ी खबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की है कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है। यह मौत अमेरिका और इजरायल द्वारा शनिवार को तेहरान में किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खामेनेई को इतिहास के सबसे दुष्ट व्यक्तियों में से एक बताते हुए कहा कि उनकी मौत ईरानी जनता के लिए अपना देश वापस पाने का सबसे बड़ा अवसर है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि खामेनेई हमारी खुफिया जानकारी और ट्रैकिंग सिस्टम से बचने में पूरी तरह विफल रहे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान पर सटीक और भारी बमबारी का सिलसिला अभी रुका नहीं है और यह बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, इजरायली अधिकारियों ने भी नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि की है कि खामेनेई के परिसर के पास हुए हमलों में उनकी मृत्यु हो गई है।
तेहरान में सन्नाटा और धुएं का गुबार
ईरानी सरकारी मीडिया ने भी राजधानी में कई विस्फोटों की सूचना दी है। तेहरान के मध्य जिलों से धुएं के काले बादल उठते देखे गए हैं और सर्वोच्च नेता के कार्यालय की ओर जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया है। देश में मोबाइल नेटवर्क बाधित हैं और हवाई क्षेत्र को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
86 वर्षीय खामेनेई वर्ष 1989 से सत्ता में थे, जो उन्हें मध्य पूर्व का सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला राष्ट्राध्यक्ष बनाता था। उनकी मौत 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में केवल दूसरा नेतृत्व परिवर्तन होगा।
अगला उत्तराधिकारी कौन?
खामेनेई के निधन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उत्तराधिकार को लेकर है। ईरानी संविधान के अनुसार, 88 सदस्यीय 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' नए सर्वोच्च नेता का चयन करेगी। इस दौड़ में कई प्रमुख नाम शामिल हैं।
आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी: ईरान की मदरसा प्रणाली के प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के सदस्य। उन्हें मौजूदा व्यवस्था की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है।
हुज्जत-उल-इस्लाम मोहसिन कौमी: खामेनेई के कार्यालय के वरिष्ठ सलाहकार और उनके बेहद करीबी भरोसेमंद।
आयतुल्लाह मोहसिन अराकी: असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के पुराने सदस्य और धार्मिक साख रखने वाले अनुभवी नेता।
जी.एच. मोहसेनी एजेई: ईरान के वर्तमान न्यायपालिका प्रमुख। इनका राष्ट्रीय सुरक्षा का अनुभव अस्थिरता के समय में निर्णायक हो सकता है।
हाशमे हुसैनी बुशेहरी: कौम के शुक्रवार प्रार्थना नेता, जो वरिष्ठ मौलवियों के बीच काफी प्रभावशाली हैं।
खामेनेई की मौत ऐसे समय में हुई है जब ईरान पहले से ही इजरायल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों के साथ सीधे सैन्य संघर्ष में उलझा हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नया नेता चुनने की प्रक्रिया में आंतरिक प्रतिद्वंद्विता और सत्ता का संघर्ष ईरान की आंतरिक स्थिरता को हिला सकता है। यह न केवल ईरान की भविष्य की विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम की दिशा तय करेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व के सुरक्षा समीकरणों को हमेशा के लिए बदल देगा।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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