केतन मर्डर केस: पुलिस को झटका, सिया गोयल और चेतन चौधरी को कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा
पुणे की एक अदालत ने केतन अग्रवाल की हत्या की आरोपी उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस रिमांड की मांग खारिज कर उसे झटका दिया है।

महाराष्ट्र में पुणे के केतन अग्रवाल की कथित हत्या के आरोपी उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को पुणे की एक अदालत ने आज (शुक्रवार, 3 जुलाई) को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों आरोपियों की आज पुलिस रिमांड खत्म हो रही थी। पुलिस हिरासत खत्म होने के बाद दोनों आरोपियों को फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट एएम विभूते के सामने पेश किया गया, जहां कोर्ट ने दोनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आगेश दिया। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने तीन दिन और पुलिस रिमांड बढ़ाने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया।
अभियोजन पक्ष का तर्क था कि सिया गोयल और चेतन चौधरी के मोबाइल फोन से मिले डेटा में इशारों और कोड वाली भाषा में चैट मिली हैं, और इन बातचीत का मतलब समझने के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ जरूरी है। दूसरी तरफ, गोयल और चौधरी के वकील ने इस मांग का विरोध किया। उनका कहना था कि पुलिस को मामले की जांच के लिए पहले ही काफी समय दिया जा चुका है और अब और हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है।
अभियोजन पक्ष की मांग खारिज
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष की मांग खारिज कर दी और आरोपियों को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बता दें कि 20 वर्षीय सिया गोयल और 22 वर्षीय चेतन चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले में एक चोटी पर से केतन अग्रवाल को धक्का दे दिया, जिससे 300 फीट गहरी खाई में गिरने से उसकी मौत हो गई। केतन अग्रवाल और सिया गोयल की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी।
मामले की जांच लगातार जटिल होती जा रही
दूसरी तरफ, इस मामले की जांच लगातार जटिल होती जा रही है, क्योंकि पुलिस को अब तक न तो कोई चश्मदीद गवाह मिला है और न ही कोई ऐसा सीसीटीवी फुटेज हाथ लगा है जो सीधे तौर पर इस अपराध को दिखाता हो। इसलिए, जांचकर्ता मुख्य रूप से परिस्थितियों से जुड़े साक्ष्यों पर निर्भर हैं और साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं कि प्रक्रियात्मक कमियों के कारण अदालत में मामला कमजोर न पड़े। अधिकारी कथित तौर पर मेघालय में हाल ही में हुए सोनम रघुवंशी हनीमून हत्याकांड के मामले को ध्यान में रख रहे हैं। इस मामले में जांच के दौरान प्रक्रियात्मक और कानूनी कमियों के कारण आरोपी जमानत मंजूर करवाने में सफल रहे थे। महाराष्ट्र पुलिस अब यह सुनिश्चित कर रही है कि वैसी गलतियों को दोहराने से कैसे बचा जाए। सूत्रों के अनुसार, यह मामला फिलहाल पूरी तरह से परिस्थितियों पर आधारित साक्ष्यों पर टिका है।
हालांकि, सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर आरोपी चेतन चौधरी को हुड वाली पोशाक पहने हुए और इलाके में घूमते हुए देखा गया है, लेकिन यह सीधे तौर पर हत्या में उसकी संलिप्तता स्थापित नहीं करता है। पुलिस ने एक पुतले का उपयोग करके अपराध के दृश्य का पुनर्निर्माण भी किया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि गिरने के दौरान एक पुतले का व्यवहार एक वास्तविक व्यक्ति से भिन्न हो सकता है, जिससे इस तरह के पुनर्निर्माण का साक्ष्य के रूप में मूल्य सीमित हो जाता है।
पॉलीग्राफ टेस्ट पर टिका आसरा
विश्वसनीय सूत्रों से संकेत मिलता है कि जांचकर्ता मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ यानी झूठ पकड़ने वाला परीक्षण कराने की तैयारी कर रहे हैं। कानून के तहत, इस परीक्षण के परिणाम अदालत में ठोस सबूत के रूप में स्वीकार्य नहीं हैं। जांचकर्ताओं का हालांकि मानना है कि यह परीक्षण ऐसे सुराग प्रदान कर सकता है, जो कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य खोजने में मदद कर सकते हैं।पुलिस को उम्मीद है कि अगर सिया पूछताछ के दौरान अनजाने में लोहागढ़ घाटी या अन्य संदिग्ध परिस्थितियों के बारे में जानकारी प्रकट करती है, तो जांचकर्ता इंटरनेट ब्राउज़र इतिहास, स्थान रिकॉर्ड और हटाये गये संदेशों सहित सहायक डिजिटल साक्ष्य तलाश और बरामद कर सकते हैं। कानूनी रूप से प्राप्त किए जाने पर ऐसे डिजिटल साक्ष्य अभियोजन पक्ष के मामले को काफी मजबूत कर सकते हैं। (भाषा इनपुट्स के साथ)


