मैं हाथ जोड़ता हूं… अब राष्ट्रपति के पास गुहार लेकर पहुंचे केतन के पिता, सिया के लिए क्या मांग
सिया गोयल ने प्रेमी संग मिलकर मंगेतर केतन विशाल अग्रवाल को लोहगढ़ किले से धक्का दे दिया था। केतन की मौत को पहले एक्सीडेंट बताने की कोशिश की गई लेकिन अब सिया पुलिस की कस्टडी में है।

महाराष्ट्र में पुणे के लोहगढ़ किले में केतन अग्रवाल की बेरहमी से हत्या के एक महीने पूरे होने को है। केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी संग मिलकर बीते 18 जून को केतन को यहां 400 फीट गहरी खाई में धकेल दिया था। इस हादसे ने केतन को परिवार को झकझोर कर रख दिया है। अब केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल न्याय की गुहार लेकर राष्ट्रपति के पास पहुंचे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ईमेल लिखकर गुज़ारिश की है कि उनके बेटे को भी महज एक फाइल बनाकर ना छोड़ दिया जाए और दोषियों को सजा मिले।
बता दें कि पुलिस जांच के दौरान सिया गोयल और चेतन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस के मुताबिक सिया केतन को अपने प्यार के बीच रोड़ा मानती थी। इसीलिए उसने चेतन संग मिलकर उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई। इसके बाद वह अपने जन्मदिन के दिन ट्रेकिंग के बहाने लोहगढ़ किले के पास ले गई जहां योजनाबद्ध तरीके से केतन को खाई में धक्का दे दिया। फिर उसे एक एक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश भी की। हालांकि जांच में सच का खुलासा हो गया। केतन और सिया की बीते फरवरी महीने में ही सगाई हुई थी और नवंबर में दोनों की शादी भी होनी थी। इससे पहले ही सिया ने केतन को रास्ते से हटा दिया। अब पिता न्याय की मांग कर रहे हैं।
क्या बोले केतन के पिता?
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक केतन के पिता ने पूरे मामले की फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई करने और जल्द से जल्द न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। राष्ट्रपति के सचिव को बुधवार को भेजे गए इस ईमेल में केतन के पिता ने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा, “मैं यह ईमेल बेहद दर्द और उम्मीद से लिख रहा हूं। मैं किसी कारोबारी के तौर पर यह सब नहीं लिख रहा। मैं सिर्फ एक बाप हूं जो अपने बेटे के लिए इंसाफ मांग रहा है। मेरे बेटे केतन की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उस दिन के बाद से हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। हर सुबह हम उसी दर्द के साथ जागते हैं और हर रात इसी सवाल के साथ सोते हैं कि केतन को इंसाफ कब मिलेगा?”
20 दिनों में उजड़ गया पूरा परिवार
विशाल अग्रवाल ने आगे लिखा कि इस त्रासदी ने उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने लिखा, "दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। केतन को खोने के महज 20 दिनों के भीतर मैंने अपने पिता को भी खो दिया। वे अपने पोते से सबसे ज्यादा प्यार करते थे। वे केतन की मौत का सदमा और दुख बर्दाश्त नहीं कर सके। उनका ब्लड प्रेशर गिर गया और आखिरकार उनके दिल ने काम करना बंद कर दिया। सिर्फ 20 दिनों के भीतर, मैंने अपने बेटे और अपने पिता दोनों को खो दिया। हमारा पूरा परिवार बिखर गया है।"
सिर्फ एक फाइल मत बनने दीजिए…
केतन के पिता ने आगे आरोपी सिया गोयल का नाम लिखे बिना कहा कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने लिखा, “हम कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मांग रहे। हम बस यही चाहते हैं कि इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाई जाए ताकि जल्द से जल्द न्याय मिल सके। जिन लोगों ने यह घिनौना काम किया है, उन्हें कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। न्याय में देरी हम जैसे परिवारों के दर्द को और बढ़ा देती है।”
आगे उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “केतन तो अब वापस नहीं आ सकता। लेकिन दोषियों को यह नहीं लगना चाहिए कि वे इतने क्रूर अपराध के बाद भी बच सकते हैं। सख्त सजा से हमें न सिर्फ थोड़ी शांति देगी, बल्कि समाज में यह संदेश भी देगी कि मासूमों की जिंदगी मायने रखती है।" विशाल अग्रवाल ने हाथ जोड़कर राष्ट्रपति से इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने का अनुरोध किया और लिखा, "कृपया मेरे बेटे के केस को सिर्फ एक और सरकारी फाइल मत बनने दीजिए। इस केस के पीछे एक ऐसा परिवार है जिसने अपना सब कुछ खो दिया है।"
लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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