बकाया थी फीस, वकीलों ने कोर्ट से की फैसला रोकने की मांग; जज ने ठोक दिया 50 हजार जुर्माना

Apr 11, 2026 07:30 pm ISTDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, तिरुवनंतपुरम
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केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में दो वकीलों पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। इन वकीलों ने अपने पूर्व क्लाइंट्स से बकाया फीस वसूलने के लिए भूमि अधिग्रहण केस में फैसला रोकने की मांग उठाई थी।

बकाया थी फीस, वकीलों ने कोर्ट से की फैसला रोकने की मांग; जज ने ठोक दिया 50 हजार जुर्माना

केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में दो वकीलों पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। इन वकीलों ने अपने पूर्व क्लाइंट्स से बकाया फीस वसूलने के लिए भूमि अधिग्रहण केस में फैसला रोकने की मांग उठाई थी। इसके लिए दोनों वकीलों ने हाई कोर्ट में रिट पेटिशन डाली थी। जस्टिस बेकू कुरियन थॉमस ने वकीलों के इस आचरण की कड़ी निंदा की। साथ ही उन्होंने यह भी कहाकि कोई भी वकील कानूनी कार्यवाही को रोककर क्लाइंट पर शुल्क भुगतान करने के लिए दबाव नहीं डाल सकता।

कानूनी गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाले
अदालत ने इस मामले में कहाकि इस तरह के कृत्य कानूनी गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाले हैं। इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। जस्टिस थॉमस ने कहाकि चाहे हालात कछ भी हों, क्लाइंट पर दबाव नहीं बनाया जा सकता। वकील द्वारा फीस चुकाने के लिए क्लाइंट को ब्लैकमेल करना ठीक नहीं है। उन्होंने आगे कहाकि इससे भी खराब स्थिति तब होती है जब वकील, अपनी नियुक्ति समाप्त होने के बाद, उसी कार्यवाही को रोकने का प्रयास करता है जिसमें वह मुकदमेबाज की ओर से उपस्थित था। अदालत ने यह फैसला आठ अप्रैल को सुनाया।

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा
केरल हाई कोर्ट के फैसले में आगे कहा गया है कि कानूनी पेशे से जुड़ी प्रतिष्ठा इसके सदस्यों के आचरण पर निर्भर करती है। अदालत ने वकीलों को चेतावनी दी कि अगर उनके काम से उनके अपने मुवक्किलों को नुकसान पहुंचे या न्याय में देरी हो, तो यह सीधे पेशे की गरिमा के लिए ठीक नहीं है।

अदालत ने यह भी कहाकि अगर यह मान भी लिया जाए कि याचिकाकर्ता बकाया शुल्क के बारे में सही हैं, तब भी एक वकील को कोई अधिकार नहीं कि वह अपनी फीस मिलने तक कानूनी कार्यवाही को रोक सके। कोर्ट ने आगे कहाकि वकीलों को बकाया फीस का मामला सुलझाने के लिए सिविल कोर्ट का रुख करना चाहिए। उन्होंने कहाकि हाई कोर्ट के सामने रिट पेटिशन दायर करना, इस तरह के मामलों में कोई उपाय नहीं है।

क्या है मामला
यह मामला दो वकीलों और उनके पूर्व क्लाइंट्स से संबंधित है। वकीलों (याचिकाकर्ता) ने, रिट के जरिए हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने दावा किया उन्होंने कई साल तक अपने क्लाइंट्स की तरफ से मामले की पैरवी की है। लेकिन इसके बावजूद उन्हें इसकी उचित फीस नहीं दी गई। वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि नए वकील ने बिना उनकी एनओसी के ही केस ले लिया। इसलिए, वकीलों ने अपनी फीस विवाद के निपटारे तक भूमि अधिग्रहण से संबंधित फैसला रोके जाने का अनुरोध किया। हाई के समक्ष दायर रिट के चलते इस मामले में कार्रवाई कई महीनों तक रुकी रही।

क्लाइंट ने क्या कहा
वहीं, इस मामले में क्लाइंट्स का कहना है कि वकीलों को ठीक-ठाक रकम दी गई थी। इसके बावजूद, वह लोग गलत और गैरवाजिब मांग करते रहे। क्लाइंट्स ने यह भी तर्क दिया कि हालत यह हो गई थी कि उनका इन वकीलों से भरोसा उठ गया था। ऐसे में मजबूर होकर उसे नया वकील करना पड़ा। हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई से इनकार करते हुए कहाकि इस तरह के केसेज पहले सिविल कोर्ट में जाने चाहिए।

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मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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