पुलिस के एक बयान पर केरल हाई कोर्ट ने वापस ली महाकुंभ वायरल गर्ल को दी गई पुलिस सुरक्षा, रद्द किया अपना पिछला आदेश
मध्य प्रदेश पुलिस ने फरमान पर अपहरण समेत कई अपराधों के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 शामिल हैं।

केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अपने पिछले आदेश को रद्द करते हुए प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान चर्चा में आई थी युवती को दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपना आदेश इस आधार पर वापस ले लिया, क्योंकि पुलिस युवती का पता ही नहीं लगा सकी। पुलिस ने कहा कि उसका पता नहीं लगाया जा सका।
पुलिस के मुताबिक जब उन्होंने सुरक्षा आदेश को लागू करने की कोशिश की, तो लड़की का पता नहीं चल सका। जिसके बाद जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की बेंच ने अपना पिछला अंतरिम आदेश रद्द कर दिया, साथ ही पुलिस को निर्देश दिया कि जब युवती सुरक्षा की मांग करते हुए उनके पास आए, तो उसे पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाए। कोर्ट ने कहा, 'अंतरिम आदेश रद्द किया जाता है। अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।' इस बात की जानकारी युवती के वकील पीएस अनीशाद ने दी।
युवती ने याचिका लगाकर मांगी थी पुलिस सुरक्षा
इससे पहले हाई कोर्ट ने पुलिस सुरक्षा का आदेश युवती की उस याचिका पर दिया था, जिसमें उसने अपनी जान की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार और एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस स्टेशन के SHO को निर्देश देने की मांग की थी। युवती के पति फरमान पर उसके अपहरण का आरोप है। इस बारे में उसके पिता की शिकायत पर मध्य प्रदेश पुलिस ने FIR दर्ज की थी, जिन्होंने दावा किया है कि वह नाबालिग है।
प्रयाग महाकुंभ के दौरान वायरल हुई थी युवती
इंदौर के पास खरगोन की रहने वाली यह युवती अपनी मुस्कान और खूबसूरत आंखों की वजह से तब मशहूर हो गई थी जब पिछले साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगे कुंभ मेले में वह रुद्राक्ष की माला बेच रही थी। इसी दौरान एक कंटेंट क्रिएटर ने उसका एक वीडियो शेयर किया था। जिसके बाद वह सोशल मीडिया सेंसेशन बन गई थी।
परिवार के विरोध के बावजूद की थी फरमान से शादी
करीब दो महीने पहले उसने अपने परिवार के विरोध के बावजूद केरल में CPI(M) के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मुस्लिम धर्म के युवक फरमान से शादी की थी। बाद में उसके परिवारजनों ने उसके नाबालिग होने का दावा करते हुए थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके चलते मध्य प्रदेश पुलिस ने फरमान पर अपहरण समेत कई अपराधों के तहत मामला दर्ज कर लिया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 शामिल हैं।
इससे पहले दो जून को मध्य प्रदेश की विशेष पॉक्सो अदालत ने युवती के अपहरण केस में आरोपी मोहम्मद फरमान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अभियोजन का कहना है कि पीड़िता नाबालिग है और आरोपी पर बहला-फुसलाकर केरल ले जाकर निकाह करने का आरोप है। मामले की जांच जारी है।
लेखक के बारे में
Sourabh Jainसौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।
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