
संबंध सहमति से बनाए गए, नहीं चल सकता रेप का मुकदमा; हाईकोर्ट ने क्यों सुनाया ऐसा फैसला?
केरल हाईकोर्ट में एक महिला द्वारा एक शख्स पर लगाए गए आरोपों को लेकर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान महिला ने आरोप लगाए थे कि शख्स ने उसके साथ लंबे समय तक संबंध बनाए, उससे शादी करने का वादा किया, लेकिन बाद में किसी और से शादी कर ली।
केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक महिला द्वारा शख्स पर लगाए गए बलात्कार के आरोपों को खारिज कर दिया। इस दौरान हाईकोर्ट ने कुछ अहम टिप्पणियां भी की हैं। केरल हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी रिश्ते के खत्म होने या बाद में किसी और से शादी हो जाने के बाद, पूर्व में सहमति से हुए यौन संबंध को अपने आप ही बलात्कार का मामला नहीं बनाया जा सकता है।

कोर्ट में एक महिला द्वारा शख्स पर लगाए गए आरोपों पर सुनवाई चल रही थी। शख्स पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 493 (धोखे से संबंध बनाना) और 496 (कपटपूर्ण विवाह समारोह) के तहत मामले दर्ज थे। महिला ने आरोप लगाए थे कि शख्स ने उसे झांसा देकर लगातार संबंध बनाए, शादी करने का वादा किया, लेकिन बाद में किसी और से शादी कर ली।
जानकारी के मुताबिक दोनों के बीच यह रिश्ता 2009 में शुरू हुआ था। तब शिकायतकर्ता महिला पहले से ही शादीशुदा थी और उसके दो बच्चे थे। 2013 में उसके पति की मृत्यु के बाद, आरोपी उसके साथ रहने लगा और रिश्ता जारी रखा। वहीं 2014 में आरोपी ने कानूनी तौर पर दूसरी महिला से शादी कर ली। जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया कि वह अब भी उसे अपनी पत्नी मानता है। लेकिन 2017 में, उसने रिश्ता खत्म कर दिया, जिसके बाद महिला ने बलात्कार और धोखाधड़ी से शादी का आरोप लगाते हुए एक आपराधिक मामला दर्ज कराया।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान जस्टिस जी गिरीश ने कहा कि अगर कोई पुरुष बेहतर भविष्य की तलाश में किसी और से शादी करता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि किसी अन्य महिला के साथ उसका सहमति से बना पिछला संबंध कानून के तहत बलात्कार बन जाता है। हाईकोर्ट ने कहा कि उनके बीच संबंध स्पष्ट रूप से सहमति से थे और शादी के किसी झूठे वादे से प्रेरित नहीं थे। अदालत ने व्यक्ति के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाही भी रद्द कर दी।





