पूरा राज्य ही बिजली कटौती से परेशान, सत्ता पक्ष का पिछली सरकार पर आरोप, मीम्स बने
पूरा केरलम राज्य इस समय बिजली संकट से जूझ रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। वहीं जनता इस कटौती से परेशान होकर अपनी दिक्कतों को सोशल मीडिया पर शेयर कर रही है।

भारत का दक्षिणी राज्य केरलम इन दिनों बिजली की कटौती से परेशान है। पूरे राज्य में बड़े स्तर पर कटौती की जा रही है। सत्ता पक्ष ने इसका आरोप पिछली सरकारों की नाकामी और बढ़ते ग्रिड पर बढ़ते दबाव पर लगाया है। दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा कि केरलम में बिजली खरीद समझौतों के जरिए कमीशन के लिए जानबूझकर बिजली का 'कृत्रिम' संकट पैदा किया जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के आरोप प्रत्यारोप के बीच बिजली संकट से परेशान जनता ने जमकर मीम्स बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिए हैं।
लगातार बिजली कटौती से परेशान जनता के मुद्दों को उठाने के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता के वरिष्ठ नेता एम. एम. मणि ने शुक्रवार को कांग्रेस नेतृत्व वाले सत्तापक्ष के गठबंधन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "''मेरी समझ कहती है कि (बिजली खरीद के लिए) समझौते करने और कमीशन कमाने के लिए यह कृत्रिम संकट पैदा किया जा रहा है। चूंकि सत्ता में कांग्रेस है, इसलिए मुझे इस पर पूरा शक है। आखिरकार, बिजली खरीद के इन बड़े समझौतों में भारी रकम का लेन-देन होता है।''
मणि ने कहा कि सामान्य बारिश होने पर जलविद्युत क्षमता का पूरा इस्तेमाल करके केरलम अपनी जरूरत की करीब 40 प्रतिशत बिजली खुद उत्पादित कर सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत की बाकी 60 प्रतिशत बिजली विभिन्न समझौतों के तहत बिजली खरीदकर पूरी करनी होगी। उन्होंने कहा कि विद्युत मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल और एलडीएफ सरकार के दौरान भी इस क्षेत्र का प्रबंधन इसी तरह किया जाता था।
ओमान चांडी की सरकार इस बिजली संकट के लिए जिम्मेदार नहीं- माकपा
माकपा नेता मणि उन दावों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि ओमन चांडी सरकार के दौरान किए गए दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों को रद्द किया जाना मौजूदा संकट के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने सवाल किया, ''ओमन चांडी सरकार द्वारा किए गए उन समझौतों को रद्द किए हुए पिनराई विजयन सरकार को 10 साल हो चुके हैं। क्या मैं इस दौरान एक बार भी मंत्री नहीं था? क्या तब कोई संकट नहीं था?'' मणि ने कहा कि बारिश की कमी और जलाशयों में घटते जलस्तर की स्थिति से उचित योजना और दूरदर्शिता के जरिए निपटा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए और लोगों को परेशानी में डाले बिना पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए।
बिजली कटौती पर केरल सरकार का क्या पक्ष
केरल में बढ़ते बिजली संकट के बीच राज्य सरकार भी हरकत में आई है। केरलम के मुख्यमंत्री केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने राज्य में गंभीर बिजली संकट के बीच शुक्रवार को आपात समीक्षा बैठक बुलाई। सतीशन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मौजूदा बिजली संकट से निपटने के लिए मुख्य सचिव बिश्वनाथ सिन्हा और केएसईबी के सीएमडी एम. जी. राजामणिक्कम के साथ आपात समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।'' मुख्यमंत्री ने बिजली संकट को लेकर विपक्षी दलों की बढ़ती आलोचना के बीच यह बैठक की।
इससे पहले दिन में, बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने कहा कि केरलम राज्य विद्युत बोर्ड बिजली की किल्लत को दूर करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को मौजूदा सरकार को दोष नहीं देना चाहिए, क्योंकि उसके कार्यकाल के दौरान हुई चूकों ने भी इस संकट को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में बिजली की मांग 1,000 मेगावाट से अधिक बढ़ गई है जबकि बिजली उत्पादन में गिरावट आई है। इसलिए यह संकट बढ़ गया है।
सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़
बिजली कटौती को लेकर एक और जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। वहीं दूसरी ओर परेशान जनता अपनी दिक्कतों को सोशल मीडिया पर शेयर करती हुई नजर आ रही है। केरल में सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर रील्स और मीम्स शेयर करने शुरू कर दिए हैं।


