केरल को मिलेगी पहली महिला CM? UDF के पास 40 साल पुरानी गलती सुधारने का मौका; जब गौरी अम्मा को मिलते-मिलते रह गया था पद
बात तब की है जब राज्य को पहली महिला मुख्यमंत्री मिलने की पूरी उम्मीद जग गई थी। लेकिन आखिरी समय में गौरी अम्मा को यह पद नहीं दिया गया। राजनीतिक गलियारों में यह फैसला आज भी एक ऐतिहासिक गलती माना जाता है।

चुनावी नतीजों के शोर के बीच केरल में एक दशक बाद सत्ता परिवर्तन का इशारा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, UDF ने अपनी बड़ी बढ़त बना ली है और अनुमान है कि विपक्षी गठबंधन यहां 100 सीट के लक्ष्य के करीब पहुंच सकता है। अब इन नतीजों ने राज्य के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। चर्चा है कि UDF से करीब 7 महिला विधायक विधानसभा पहुंच सकती हैं। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या साक्षरता दर में देश में सबसे अव्वल रहने वाले केरल को राज्य की पहली महिला CM मिलेगी। अगर ऐसा हुआ तो यह UDF के पास अपनी 40 साल पुरानी एक गलती को सुधारने का भी मौका है।
UDF की इस भूल की बात करें तो एक नाम का जिक्र जरूरी है। यह नाम है- के.आर. गौरी अम्मा। गौरी अम्मा राजनीति में महिलाओं के लिए बड़ी प्रेरणा बन कर उभरीं । उन्होंने राज्य की राजनीति में अहम भूमिका भी निभाई। इसके बाद 1987 में यह उम्मीद थी कि वह राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनेंगी, लेकिन आखिरी समय में उन्हें यह पद नहीं मिल पाया। इस फैसले को आज भी एक ‘ऐतिहासिक गलती’ माना जाता है और अब UDF के पास इसी कर्ज को चुकाने का मौका है।
महिलाओं को ज्यादातर मिले ‘सॉफ्ट’ डिपार्टमेंट
इतिहास में जाएं तो केरल में महिलाओं को ज्यादातर सॉफ्ट माने जाने वाले डिपार्टमेंट ही दिए गए। 1957 में के.आर. गौरी अम्मा को रेवेन्यू और एक्साइज विभाग मिला। फिर 1967 में उन्हें रेवेन्यू, फूड और सिविल सप्लाई, 1980 में एग्रीकल्चर और सोशल वेलफेयर, 1987 में इंडस्ट्रीज, सोशल वेलफेयर और एक्साइज जैसे विभाग मिले। कुछ अन्य महिलाओं की बात करें तो एम कमलम को 1982 में कोऑपरेशन और एससी-एसटी वेलफेयर, एमटी पद्मा को 1991 में फिशरीज, सुशीला गोपलन को 1996 में इंडस्ट्रीज, पीके श्रीमती को 2006 में हेल्थ जैसे विभाग मिले। वहीं केके शैलजा 2016 को हेल्थ और सोशल जस्टिस, वीना जॉर्ज को 2021 में हेल्थ, आर बिंदु को 2021 में को हायर एजुकेशन की जिम्मेदारी मिली।
कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
केरल में UDF के अंदर मुख्यमंत्री पद के लिए वी.डी. सतीशन और रमेश चेन्निथला जैसे नाम चर्चा में हैं। हालांकि कांग्रेस हाईकमान ने इसे लेकर अलग संकेत दिए हैं। दरअसल राहुल गांधी और सोनिया गांधी कई बार “बॉयज क्लब” वाली राजनीति खत्म करने की बात कर चुके हैं। चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने संकेत दिया था कि केरल को आगे ले जाने के लिए शीर्ष स्तर पर महिला नेतृत्व जरूरी हो सकता है। ऐसे में कांग्रेस किसी महिला चेहरे को आगे लाने पर विचार कर सकती है।
क्या कह रहे जानकार?
महिला उम्मीदवारों में एडवोकेट फातिमा ताहलिया जैसे नेताओं के नाम चर्चा में है। वह इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की नई पहचान बनकर सामने आई हैं। अगर उन्हें लॉ या एजुकेशन जैसे बड़े विभाग मिलते हैं तो यह पार्टी की छवि में बड़ा बदलाव माना जाएगा। जानकारों का कहना है कि भले ही महिला मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद कम हो, लेकिन अगर मुख्यमंत्री पद नहीं दिया जाता, तो कम से कम एक महिला को स्पीकर बनाया जाना चाहिए और पांच महिलाओं को अहम मंत्रालय दिए जाएं, वरना मतदाताओं में गलत संदेश जाएगा।
लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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