
UP को मिला OBC नेता, सवर्ण को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाएगी भाजपा? रेस में इन नेताओं के नाम
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में पार्टी ने राज्य में गैर यादव ओबीसी समुदाय को बड़ा संदेश देकर विपक्ष की पीडीए की राजनीति को झटका देने की कोशिश की है।
उत्तर प्रदेश में अध्यक्ष पद पर ओबीसी समुदाय से आने वाले केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की ताजपोशी तय कर भाजपा ने कई राजनीतिक संदेश दिए हैं। इसके बाद अब राष्ट्रीय अध्यक्ष की चर्चा तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का संगठन ओबीसी को सौंपने के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष की कमान अगड़े समुदाय के नेता के पास रहने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। हालांकि, पार्टी के एक नेता ने कहा कि गैर अगड़े समुदाय के कई नेता ऐसे हैं जिनकी स्वीकार्यता उनके अपने समुदाय से ज्यादा अगड़े समुदाय में है। क्षेत्रीय संतुलन में अब पूर्वी क्षेत्र के पास संगठन की कमान जा सकती हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की रेस में फिलहाल जिन नामों की चर्चा है उनमें से अधिकांश ओबीसी समुदाय से आते हैं। उनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम सबसे आगे चल रहा है। इसके अलावा, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ-साथ महासचिव सुनील बंसल के नाम की चर्चा है। हालांकि, भाजपा का इतिहास चौंकाने वाला रहा है।
14 जनवरी को खरमास समाप्त होने के साथ ही भाजपा कभी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रक्रिया को तेज कर सकती है। भाजपा का संविधान कहता है कि 37 प्रदेशों और केंद्र शासित प्रदेशों में से आधे यानी 19 में संगठन के चुनाव पूरे होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है। अब उत्तर प्रदेश में भी प्रदेश अध्यक्ष का चयन की प्रक्रिया हो चुकी है। इसके बाद कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली, त्रिपुरा जैसे राज्य ही बचे हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होने में कोई दिक्कत नहीं है।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में पार्टी ने राज्य में गैर यादव ओबीसी समुदाय को बड़ा संदेश देकर विपक्ष की पीडीए की राजनीति को झटका देने की कोशिश की है। साथ ही साफ कर दिया है कि राज्य में पार्टी का चेहरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही हैं। इससे राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए अब सामाजिक व राजनीतिक समीकरण साफ होने लगे हैं। बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा को सामाजिक रूप से मजबूत गठबंधन होने के बावजूद यूपी में बड़ा झटका लगा था। ओबीसी समुदाय का एक बड़ा हिस्सा उससे दूर चला गया था और इसे देखते हुए विपक्ष ने भी पीडीए का कार्ड खेलना शुरू कर दिया था।
अब पार्टी ने ओबीसी (कुर्मी) समुदाय से आने वाले नेता को अध्यक्ष पद पर बिठाकर साफ कर दिया है कि वह इस समुदाय को पूरी तरह से साथ लेकर चल रही है। अगर पार्टी अध्यक्ष पद किसी सामान्य वर्ग के नेता को देती तो इससे ओबीसी को साधे रखना तो मुश्किल होता ही, साथ ही बदलावों को भी हवा मिलती। क्योंकि, सत्ता और संगठन दोनों अगड़ों के पास रखा जाना मुश्किल होता। पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि पंकज चौधरी सात बार से सांसद होने से वरिष्ठता में किसी से कम नहीं हैं। साथ ही अपनी लो प्रोफाइल कार्यशैली से किसी के लिए चुनौती भी नहीं बनते हैं। ऐसे में पार्टी और जनता में यह सीधा संदेश रहेगा कि मुख्यमंत्री योगी ही प्रदेश में पार्टी का चेहरा हैं।





