SIR में 16.38 लाख 'मृत' वोटर, कर्नाटक की सालाना मौतों से 4 गुना ज्यादा!
ऐसे में वोटर लिस्ट में एक साथ 16.38 लाख जीवित/मृत वोटरों का 'डेड' कैटेगरी में आ जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

कर्नाटक की वोटर लिस्ट में 'गड़बड़ी और विसंगतियों' को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। राज्य में एब्सेंट शिफ्टेड डुप्लीकेट डेड एंड अदर्स (ASDDO) श्रेणियों के तहत चिन्हित 1.08 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं में से 16.38 लाख से ज्यादा मतदाताओं को 'मृत' घोषित कर दिया गया है। यह संख्या राज्य में एक साल में दर्ज होने वाली औसतन मौतों के आंकड़े से करीब चार गुना ज्यादा है।
क्या कहते हैं जनसांख्यिकी आंकड़े (SRS)?
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, 2002 से 2024 के बीच सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की ओर से जारी आंकड़ों और क्रूड डेथ रेट के विश्लेषण से पता चलता है कि कर्नाटक में सालाना औसतन 4.26 लाख लोगों की मौत होती है।
- 22 सालों में कुल अनुमानित मौतें: लगभग 98 लाख।
- सालाना औसत मौतें: लगभग 4.26 लाख।
- कोरोना काल का उच्चतम स्तर: महामारी के दौरान साल 2021 में राज्य में सबसे ज्यादा 5.2 लाख मौतें दर्ज की गई थीं।
ऐसे में वोटर लिस्ट में एक साथ 16.38 लाख जीवित/मृत वोटरों का 'डेड' कैटेगरी में आ जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये सभी मौतें एक ही साल में हुई हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि सालों से वोटर लिस्ट को अपडेट नहीं किया गया था।
100% डिजिटलाइजेशन के बावजूद बढ़े आंकड़े
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की तरफ से फॉर्म्स के 100% डिजिटलाइजेशन का दावा करने के बाद भी इस आंकड़े में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई।
5 अगस्त को ASDDO लिस्ट सार्वजनिक होने के अगले दिन 'मृत' कैटेगरी में 16.3 लाख वोटर दर्ज थे। जबकि 17 अगस्त तक गणना चरण खत्म होते-होते यह संख्या बढ़कर 16.38 लाख हो गई।
जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "हमें यह अहसास हुआ कि बड़ी संख्या में मृत मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में थे। लेकिन मैं इन आंकड़ों पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं कर सकता, क्योंकि हर एक मामले का वैरिफिकेशन डेथ सर्टिफिकेट या मौके पर पंचनामा करके किया जा रहा है।"
बिहार में 'जिंदों' को मृत बताने का विवाद
यह पहली बार नहीं है जब वोटर लिस्ट में इस तरह की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इससे पहले बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भी कई ऐसे मामले सामने आए थे जहां जिंदा लोगों को कागजों में 'मृत' घोषित कर दिया गया था।
सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने ऐसे दो मामले सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे थे। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार के ऐसे कुछ "कागजी रूप से मृत" वोटरों से मुलाकात कर उनके साथ चाय पी थी और तंज कसते हुए कहा था कि उन्हें बिहार के 'मृत' वोटरों के साथ चाय पीने का अनोखा अनुभव मिला।


