NEET पेपर लीक से मरे बच्चे, क्या गलती थी उनकी; HC ने बड़े अधिकारी को जमकर सुनाया
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस तरह बार-बार परीक्षाओं के रद्द होने से लोगों का भरोसा टूट रहा है। उन्होंने छात्रों द्वारा सुसाइड का मामला भी उठाया। साथ ही KPSC चेयरमैन को बेल देने से इनकार कर दिया है।

देशभर में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और एग्जाम रद्द होने की रिपोर्ट्स के बीच अब कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस पर चिंता जताई है। छात्रों के सुसाइड का मामला उठाते हुए हाईकोर्ट ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के निलंबित अध्यक्ष साहूकार एस शिवशंकरप्पा को भी झटका दिया है। हाईकोर्ट ने पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती घोटाले में शिवशंकरप्पा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि भर्ती परीक्षाओं में हो रही ऐसी धांधलियों की वजह से आम जनता और योग्य छात्रों का पूरी व्यवस्था से विश्वास उठता जा रहा है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों पर तुरंत रोक लगानी चाहिए और आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “सार्वजनिक परीक्षाओं की व्यवस्था से लोगों का विश्वास उठ रहा है। हमने देखा है कि NEET पेपर लीक के कारण कितने होनहार छात्रों ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने क्या गलती की थी? उनके परिवारों को कितना बड़ा नुकसान हुआ है? यह केवल परीक्षा परिणाम का सवाल नहीं है, बल्कि कई ऐसे मुद्दे हैं जिनका जवाब देने कोई आगे नहीं आ रहा है। ये सब अब रुकना चाहिए।”
क्या है पूरा KPSC भर्ती घोटाला?
यह पूरा मामला KPSC द्वारा 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में हुई कथित धांधली से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि परीक्षा में OMR शीट के साथ छेड़छाड़ की गई और कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले ही क्वेश्चन पेपर दे दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि KPSC अधिकारियों के करीबियों और रिश्तेदारों को असामान्य रूप से बहुत अधिक अंक मिले। यहां तक कि बिचौलियों ने OMR में नंबर बढ़ाकर चयन कराने के बदले उम्मीदवारों से 70 लाख से 80 लाख रुपये तक की मांग की थी।
शिवशंकरप्पा ने क्या दी दलील?
अदालत में शिवशंकरप्पा के वरिष्ठ वकील अरुणा एम श्याम ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की हाल ही में सर्जरी हुई है और वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। वकील ने यह भी कहा कि मीडिया ने इस मुद्दे को काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। हालांकि राज्य की ओर से पेश लोक अभियोजक बी एन जगदीशा ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि KPSC अध्यक्ष ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को ताक पर रख दिया था।
राज्यपाल ने किया था निलंबित
इस मामले में निचली अदालत ने 11 अगस्त को ही पूर्व चेयरमैन की अग्रिम जमानत खारिज कर दी थी। इसके बाद वे हाईकोर्ट पहुंचे थे। इससे पहले भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते 10 जुलाई को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि फैसले में कैबिनेट की सलाह न लेने के कारण निलंबन रद्द कर दिया था। हालांकि कुछ ही दिनों बाद कैबिनेट की सिफारिश पर राज्यपाल ने उन्हें दूसरी बार निलंबित कर दिया।


