Hindi NewsIndia NewsKarnataka High Court has said Indian society is most racist society commenting on petition against Sudhir Chaudhary
भारत में सबसे ज्यादा नस्लभेदी समाज, अंग्रेज चले गए लेकिन...; किस बात पर भड़का HC

भारत में सबसे ज्यादा नस्लभेदी समाज, अंग्रेज चले गए लेकिन...; किस बात पर भड़का HC

संक्षेप:

कर्नाटक हाई कोर्ट ने न्यूज एंकर सुधीर चौधरी की केस रद्द करने को लेकर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि भारतीय समाज दुनिया के सबसे ज्यादा नस्लभेदी समाजों में से एक है। अंग्रेजों ने हम पर राज किया क्योंकि हमें उस समय भारतीयता की कोई भावना नहीं थी।

Dec 07, 2025 07:03 am ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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‘भारतीय समाज दुनिया के सबसे नस्लवादी और रंगभेद करने वाले समाजों में से एक है।’ यह हमारा कहना नहीं है, बल्कि कर्नाटक हाईकोर्ट का है। कर्नाटक हाईकोर्ट की तरफ से यह टिप्पणी शुक्रवार को की गई। कोर्ट ने कहा कि हम भारतीय भले ही कई बार दूसरों के ऊपर नस्लवाद और रंगभेद का आरोप लगाते हैं लेकिन असल में हम सबसे बड़े नस्लवादी और रंगभेदी हैं।

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एंकर सुधीर चौधरी बनाम कर्नाटक राज्य केस की सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण ने कहा कि हम भारतीयों की इसी मानसिकता की वजह से भारत में समुदाय आधारित राजनीति और तुष्टिकरण की नीतियां बहुत आम हैं। उन्होंने कहा, "हम भारतीयों की... हमारे हर समुदाय की यही समस्या है कि हम नहीं समझते कि यहां केवल एक ही प्रजाति है, जिसे होमो सेपियंस कहते हैं। हम दुनिया की सबसे बड़े नस्लवादी समाजों में से एक हैं। हम दूसरे समाजों पर नस्लवाद और रंगभेद का आरोप लगाते हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि हम भी किसी से कम नहीं है।"

जस्टिस अरुण ने राजनीतिक प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि समाज के इसी रवैये की वजह से राजनीतिक पार्टियां भी इसके अनुसार ही नेताओं का चयन करती हैं। उन्होंने कहा, "हम हर समुदाय को अलग प्रजाति की तरह देखते हैं और उसी के आधार पर भेदभाव करते हैं। इसी वजह से राजनीति में टिकट देने के समय भी पार्टियां उम्मीदवार की योग्यता से ज्यादा उसके समुदाय को महत्व देती हैं। हम कहते हैं की नेता भ्रष्ट हैं, लेकिन सच्चाई तो यह है कि लोकतंत्र में जनता को वही नेता मिलता है जिसके वह योग्य होते हैं।"

अंग्रेज चले गए लेकिन अब कॉर्पोरेट के गुलाम

जस्टिस अरुण ने भारत की गुलामी के लिए भी नस्लवादी और रंगभेदी सोच को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, "कुछ हजार अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी के सुरक्षा कर्मियों ने हमें इसलिए गुलाम बना लिया था क्योंकि हमारे भीतर उस समय भारतीयता का कोई बोध नहीं था। 200 साल की गुलामी के बाद जैसे ही वह भाव आया, हमने अँग्रेजों को भगा दिया। अब प्राइवेट कंपनियों और कॉरपोरेट सेक्टर का नव-उपनिवेशवाद शुरु हो गया है। इसका कारण फिर वही है... क्योंकि हम फिर उसी पुरानी आदत पर लौट आए हैं... इंसान को इंसान के रूप में न देखना।"

हाई कोर्ट की यह टिप्पणी न्यूज एंकर सुधीर चौधरी के केस में की, जिसमें उन्होंने 2023 में दर्ज किए गए एक हेट स्पीच केस को रद्द करने की मांग की थी। चौधरी पर आरोप था कि उन्होंने कर्नाटक सरकार की स्वावलंबी सारथी योजना पर झूठी और भड़काऊ रिपोर्ट चलाई है।

जस्टिस अरुण ने पूछा कि क्या आजतक की रिपोर्ट में सच में ऐसा कोई तथ्यात्मक झूठ था? क्या रिपोर्ट में यह था कि यह योजना केवल एक ही समुदाय को लाभ पहुंचाकर हिंदुओं को वंचित कर रही है। इस पर शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि शो में मु्स्लिम समुदाय का दानवीकरण किया गया और उनके खिलाफ घृणा फैलाई गई। हालांकि, जस्टिस अरुण ने कहा कि राज्य और शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर पाते कि रिपोर्ट में स्पष्ट झूठ कहा गया था तो चैनल और एंकर को राहत मिल सकती है।

अंतरिम आदेश पारित करते हुए जस्टिस अरुण ने कहा कि भले ही प्रतिवादी इस बात का दावा कर रहे हों कि भड़काऊ सामग्री है, लेकिन वह इसे साबित करने में सक्षम नहीं है कि कौन सा तथ्य झूठ है। इस मामले की सुनवाई अब 13 जनवरी 2026 को होगी।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak
उपेन्द्र पिछले कुछ समय से लाइव हिन्दुस्तान के साथ बतौर ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (2023-24 बैच) से पूरी की है। इससे पहले भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, राजनीति के साथ-साथ खेलों में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
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