कर्नाटक की सरकार में अंदर तक लगी है दीमक? डीके सरकार बनते ही विवाद के पीछे क्या है वजह
कर्नाटक में डीके शिवकुमार की सरकार बनते ही असंतोष से इतना तो पता चल गया है कि आने वाले समय में भी समस्याओं से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं कर्नाटक की सरकार में पहले से ही दो गुट हैं जो कि असंतोष के पीछे की वजह हो सकते हैं।

कर्नाटक में डीके शिवकुमार के शपथ लेते ही राजनीतिक संकट एक बार फिर पैदा हो गया था। हालांकि अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि संकट टल गया है। मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने देर रात तक बैठक की। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह आंतरिक मामला था और इसे सुलझा लिया गया है। हालांकि इतना तो स्पष्ट हो गया है कि सिद्धारमैया के सीएम पद से हटने और डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद विवाद खत्म नहीं हुआ बल्कि संकट की जड़ें और गहरी हो गई हैं। सिद्धारमैया अपने कद से किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहते। इसके अलावा जाहिर सी बात है कि सिद्धारमैया का भी एक गुट है जो कि किसी और का वर्चस्व कभी नहीं चाहेगा।
क्यों नाराज थे रामलिंगा रेड्डी
डीके शिवकुमार के साथ राज्य में 14 मंत्रियों ने शपथ ली थी। इनमें ही रामलिंगा रेड्डी भी शामिल थे। हालांकि वह अपने प्रोफाइल से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग देने का आश्वासन दिया गया था लेकिन बाद में जल संसाधन विभाग दे दिया गया। इसके बाद वह नाराज हो गए। उनकी नाराजगी से पार्टी नेतृत्व की भी परेशानी बढ़ गई है। हालांकि अब दावा है कि मामला सुलझा लिया गया है। इसके बाद भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भविष्ट में कोई विवाद नहीं होगा।
कैसे सुलझाया गया मुद्दा
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार जयनगर के एक होटल पहुंचे और करीब तीन घंटे तक रामलिंगा रेड्डी के साथ बातचीत की। उनके साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और रामलिंगा रेड्डी के करीबी लोग भी शामिल थे। बाद में डीके शिवकुमार ने कहा कि यह केवल विभागों में बंटवारे में गलतफहमी का मामला था जिसे बैठकर सुलझा लिया गया है।
शिवकुमार ने कहा कि उनकी दोस्ती रामलिंगा से आज की नहीं बल्कि 1980 की है। दोनों के बीच काफी मजबूत संबंध रहे हैं। वहीं रामलिंगा ने इतना ही कहा कि विवाद सुलझ गया है। हालांकि यह विवाद डीके शिवकुमार की सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जाहिर सी बात है कि शिवकुमार इस संकट के लिए पहले से तैयार नहीं रहे होंगे। अभी 14 मंत्रियों का ही शपथ ग्रहण हुआ है और 20 मंत्रिपद खाली हैं। ऐसे में जल्द ही उनको भी भरा जा सकता है। इस बार मंत्रियों के पोर्टफोलियो को लेकर डीके शिवकुमार को काफी अलर्ट रहना होगा।
बीजेपी पर भड़की कांग्रेस
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सुरजेवाला ने इस घटना को गलतफहमी का नतीजा बताया और कहा कि वरिष्ठ नेता कांग्रेस सरकार में मंत्री के रूप में अपना कार्य जारी रखेंगे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह इस विवाद का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही थी। सुरजेवाला ने रामलिंगा रेड्डी को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण नेता बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद और उन्होंने खुद रेड्डी के इस्तीफे की खबरें सामने आने के बाद उनसे बात की थी।
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लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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