Hindi NewsIndia NewsKarnataka CM Siddaramaiah appeals to Kerala P Vijayan to withdraw Malayalam language bill
भाषा को लेकर आपस में उलझे दक्षिण के यह दो राज्य, स्कूलों में मलयालम अनिवार्य करने पर विवाद

भाषा को लेकर आपस में उलझे दक्षिण के यह दो राज्य, स्कूलों में मलयालम अनिवार्य करने पर विवाद

संक्षेप:

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने केरल के समकक्ष से मलयालम भाषा विधेयक को वापस लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस बिल से सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कन्नड़ भाषी लोगों को अपनी मातृभाषा में पढ़ने का अवसर नहीं मिलेगा।

Jan 08, 2026 10:49 pm ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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दक्षिण भारत के राज्यों में हिंदी विरोध को लेकर एकता देखने को मिलती है। लेकिन भारत के इस क्षेत्र में अन्य कई भाषाएं भी हैं, जिनको लेकर आपस में भी विवाद होता रहता है। ऐसे ही एक विवाद की शुरुआत करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने केरल के समकक्ष पी विजयन से केरल विधानसभा में पारित मलयालम भाषा विधेयक को वापस लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से सीमावर्ती कासरगोड जिले में रहने वाले कन्नड़ भाषी लोगों का नुकसान होगा।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखे एक पोस्ट में कहा,"केरल सरकार द्वारा विधानसभा में मलयालम भाषा को लेकर जो विधेयक पारित किया गया है, वह भारत की भाषाई स्वतंत्रा की गारंटी पर हमला है। इस विधेयक के माध्यम से केरल के कन्नड़ माध्यम के स्कूलों में मलयालम को पहली भाषा बनाया जा रहा है।"

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, "यदि ऐसा कानून लागू होता है, तो मुख्य रूप से केरल के सीमावर्ती जिलों मुख्य रूप से कासरगोड़ में रहने वाले कन्नड़ भाषी अपनी मातृभाषा सीखने के अवसर से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें केरल की कम्युनिस्ट सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वह भाषाई अल्पसंख्यों के मौलिक अधिकारों का दमन करेगी।"

आपको बता दें कर्नाटक की सीमा पर बसा कासरगोड़ जिला प्रशासनिक तौर पर केरल का हिस्सा है, लेकिन भावनात्मक रूप से यह कर्नाटक के करीब है। यहां के ज्यादातर लोग कन्नड़ भाषा बोलते हैं और इसकी संस्कृति और साहित्य को ही पढ़ते हैं।

कर्नाटक सीएम ने कहा, “कासरगोड़ में रहने वाले लोग कर्नाटक में रहने वाले कन्नड़ भाषियों से कम नहीं है। उनके हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी भी हमारी सरकार की है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि विविधता में एकता दिखाने वाले भारत के प्रत्येक नागरिक को अपनी मातृभाषा सीखने का अधिकार है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री के अलावा कर्नाटक सीमा क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने भी केरल के राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर को अक्टूबर में केरल विधानसभा द्वारा पारित मलयालम भाषा विधेयक को मंजूरी न देने का आग्रह किया है। प्राधिकरण ने एक बयान जारी करके कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात के दौरान अपनी चिंताएं साझा की हैं।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak
उपेन्द्र पिछले कुछ समय से लाइव हिन्दुस्तान के साथ बतौर ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (2023-24 बैच) से पूरी की है। इससे पहले भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, राजनीति के साथ-साथ खेलों में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
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