कर्नाटक में BJP नेता की हत्या के मामले में कांग्रेस विधायक को उम्रकैद, कोर्ट ने सुनाया फैसला
कर्नाटक में भाजपा नेता की हत्या से जुड़े मामले में स्पेशल कोर्ट ने कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सीबीआई द्वारा दाखिल आरोप पत्र में कांग्रेस विधायक को इस जघन्य हत्या का मुख्य साजिश कर्ता बताया गया था।

कर्नाटक में कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को भाजपा नेता की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कांग्रेस विधायक के अलावा इस हत्या में शामिल 16 अन्य लोगों को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। बुधवार को निर्वाचित प्रतिनिधियों से जुड़े मामलों के लिए बैठी एक विशेष अदालत ने 10 साल पुराने मामले में यह फैसला दिया।
स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश संतोष गजानन भट्ट ने सीबीआई की मांग पर आरोपी विधायक कुलकर्णी और उसके आरोपी साथियों को इस जघन्य हत्या के लिए दोषी ठहराया। इससे पहले सीबीआई ने इस हत्या और इसकी साजिश रचने के आरोप में आरोपियों को सख्त से सख्त सजा देने की अपील की थी। दूसरी तरफ विधायक के वकील ने कुलकर्णी की सामाजिक सेवाओं, राजनीतिक पृष्ठभूमि, बच्चों और अन्य परिवार के सदस्यों के प्रति जिम्मेदारियों का हवाला देकर न्यूनतम सजा देने की अपील की थी।
क्या है पूरा मामला?
भाजपा नेता गौदार की जघन्य हत्या से जुड़ा यह मामला 2016 का है। 15 जून 2016 को धारवाड़ से भाजपा जिला पंचायत सदस्य गौदार की उनकी जिम में हत्या कर दी गई थी। इस हत्या का आरोप उस वक्त मंत्री रहे विनय कुलर्णी के ऊपर लगा था।
सीबीआई के मुताबिक, किराए के हमलावरों धारवाड़ के सप्तपुर स्थित उनके जिम में गौदार पर हमला किया और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। कांग्रेस विधायक का नाम इस हत्या में शामिल होने की खबर के बाद इसके ऊपर राजनीति बढ़ गई। गौदार के परिवार की मांग पर तत्कालीन भाजपा सरकार ने 2019 में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया।
सीबीआई ने 2020 में आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें कुलकर्णी को 'मुख्य साजिशकर्ता' बताया गया। आरोप पत्र में कहा गया कि गौदार धारवाड़ में एक उभरते हुए राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में गौदार को देखते थे और उन्हें खत्म करने के लिए उन्होंने सुपारी किलर नियुक्त किए थे।कुलकर्णी को सीबीआई ने 2020 में गिरफ्तार किया था। उन्हें अगस्त 2021 में सर्वोच्च न्यायालय से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिली, जिनमें धारवाड़ जिले में प्रवेश पर प्रतिबंध भी शामिल था। हालांकि, जून 2025 में, गवाहों को प्रभावित करने और अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित करने के प्रयासों के आरोपों के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी जमानत रद्द कर दी।
जनवरी 2026 में कुलकर्णी ने फिर से जमानत के लिए अर्जी दी, लेकिन उच्च न्यायालय ने न्यायिक औचित्य का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया। हालांकि, सभी गवाहों की जांच हो जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 27 फरवरी को उन्हें जमानत दे दी। कुलकर्णी के विधायक पद से अयोग्य घोषित होने की संभावना है।
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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