ममता के सिर से टला बड़ा संकट, कल्याण बनर्जी बोले- 'छोड़कर नहीं जाऊंगा'
कल्याण बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ममता बनर्जी का साथ छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले हैं। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर भी नरमी दिखाते हुए कहा कि वह उनके बेटे की तरह हैं।

तृणमूल कांग्रेस में कलह के बीच वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि ममता बनर्जी का साथ छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले हैं। बनर्जी ने कहा कि अभी फिलहाल ध्यान बीजेपी से निपटने पर होना चाहिए। ममता बनर्जी के लिए यह बड़ी खुशखबरी हो सकती है। दरअसल अभिषेक बनर्जी बनाम अन्य में कल्याण बनर्जी ही अपने तेवर दिखा रहे थे। वहीं अब वह खुद नरम हो गए हैं। कल्याण बनर्जी ने अब सुलह के संकेत दे दिए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा खतरा फिलहाल टल गया है।
अभिषेक बनर्जी पर नरम पड़े कल्याण
कल्याण बनर्जी ने अभिषेक को पार्टी के लिए खतरा बता दिया था। अब उन्होंने कहा, मैंने अभिषेक को अपने सामने ही बड़ा होते हुए देखा है। उन्होंने खुद कहा कि मैं उनसेकोई भी बात कर सकते हं। अब सब ठीक है। बता दें कि दूसरी ओर टीएमसी के कई सांसद बागी बने हुए हैं और ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं।
कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर हमला बोलते हुए उन पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने डायमंड हार्बर सांसद से जुड़े सभी कानूनी मामलों से खुद को अलग करने की घोषणा की थी और यहां तक कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अल्टीमेटम भी दे दिया था कि वह अपने भतीजे और उन जैसे वरिष्ठों में से किसी एक को चुनें।
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बैठक के बाद ममता बनर्जी के कालीघाट आवास से निकलते हुए अभिषेक ने पत्रकारों से कहा, ''कल्याण बनर्जी ने मुझे बचपन से देखा है। वह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्हें मुझे दो-चार कड़ी बातें कहने का पूरा हक है। इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोई जरूरत नहीं है।' उनके इसी बयान के बाद कल्याण बनर्जी का रुख भी नरम हो गया है।
कल्याण बनर्जी ने कहा, ‘मैं उनके बयान का स्वागत करता हूं। वह मेरे बेटे जैसे हैं। अच्छा है कि उन्होंने अपनी गलती समझी। हम सबको मिलकर भाजपा के खिलाफ काम करना और लड़ना है।’यह सुलह ऐसे समय में हुई जब सत्तारूढ़ पार्टी हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपनी करारी हार के नतीजों और अपने विधायी व संसदीय दोनों धड़ों में बढ़ती उथल-पुथल से जूझ रही है। राजनीतिक जानकारों ने अभिषेक की प्रतिक्रिया को एक और आंतरिक विवाद को बड़े संगठनात्मक संकट में तब्दील होने से रोकने की कोशिश के रूप में देखा।
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Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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