कालेश्वरम प्रोजेक्ट पर BRS और रेवंत रेड्डी भिड़े, किसी ने साइको कहा तो कोई बेल्ट ट्रीटमेंट पर उतरा
हरीश राव ने कहा कि किसान अपने खेतों के लिए सिंचाई का पानी मांग रहे हैं, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का आचरण उनके पद की गरिमा के तहत नहीं है।

तेलंगाना में कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना को लेकर सियासी विवाद और तेज हो गया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की प्रोजेक्ट पर की गई टिप्पणियों को लेकर विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने कड़ा विरोध जताया है। बीआरएस ने मुख्यमंत्री से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। विवाद की वजह मुख्यमंत्री का वह बयान बना, जिसमें उन्होंने विपक्षी नेताओं को 'बेल्ट ट्रीटमेंट' देने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनका खून, अहंकार और चर्बी खेतों में गिरे तो किसान उसकी खाद के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने बीआरएस नेताओं के. टी. रामाराव और टी. हरीश राव पर भी तीखा हमला बोलते हुए उन्हें कालेश्वरम परियोजना में कूद जाने तक की टिप्पणी कर दी। मुख्यमंत्री का कहना था कि बीआरएस प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं को समझे बिना इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है।
बीआरएस नेता हरीश राव ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसान अपने खेतों के लिए सिंचाई का पानी मांग रहे हैं, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रही है। हरीश राव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का आचरण उनके पद की गरिमा के तहत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष पानी छोड़ने की मांग करता है तो मुख्यमंत्री खून बहाने जैसी बातें करते हैं, जो पूरी तरह गलत है।
बीआरएस ने रेवंत रेड्डी पर साधा निशाना
हरीश राव ने कहा कि अगर किसानों को पानी देने में उनका खून ही बाधा है तो वे इसके लिए भी तैयार हैं, लेकिन किसानों को सिंचाई का पानी मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विपक्ष का खून खेतों में बहाने या बेल्ट ट्रीटमेंट जैसी भाषा का प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार कर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की।
कालेश्वरम प्रोजेक्ट पर क्या है विवाद
कालेश्वरम परियोजना को लेकर कांग्रेस और बीआरएस के बीच लंबे समय से टकराव चल रहा है। बीआरएस का आरोप है कि गोदावरी नदी में पर्याप्त पानी होने और कन्नेपल्ली पंप हाउस के संचालन की स्थिति मौजूद होने के बावजूद सरकार किसानों के लिए पानी नहीं छोड़ रही है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का कहना है कि सरकार राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की सिफारिशों का पालन करेगी। उनके अनुसार एनडीएसए ने प्रोजेक्ट के मेडीगड्डा, अन्नाराम और सुंदरिल्ला बैराजों में पानी इकट्ठा नहीं करने की सलाह दी है, क्योंकि इनमें तकनीकी खामियां सामने आई हैं। राज्य सरकार इन बैराजों की मरम्मत का काम एनडीएसए के दिशा-निर्देशों के अनुसार कर रही है।


