Hindi NewsIndia NewsKailash Satyarthi takes a dig at Donald Trump I ve never seen anyone so obsessed with Nobel Prizes
नोबेल के पीछे ऐसा पागल कभी नहीं देखा, कैलाश सत्यार्थी का डोनाल्ड ट्रंप पर तंज

नोबेल के पीछे ऐसा पागल कभी नहीं देखा, कैलाश सत्यार्थी का डोनाल्ड ट्रंप पर तंज

संक्षेप:

मारिया कोरिना मचाडो की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल पुरस्कार का मेडल सौंपने को लेकर नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि उन्होंने नोबेल के पीछे इस कदर पागल इंसान पहले कभी नहीं देखा। 

Jan 17, 2026 08:48 pm ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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वेनेजुएला में विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने हाल ही में अपना शांति का नोबल पुरस्कार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गिफ्ट कर दिया। मचाडो ने अमेरिका जाकर अपना पुरस्कार डोनाल्ड ट्रंप को सौंप दिया। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप शांति के नोबेल प्राइज के पीछे काफी दिनों से पड़े थे। इसीलिए वह दुनियाभर में युद्ध रुकवाने का दावा कर रहे थे। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच भी युद्ध रुकने का दावा की बार कर डाला। इसके बाद भी इस बार शांती का नोबेल प्राइज उन्हें नहीं मिला। नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने डोनाल्ड ट्रंप की इस सनक पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने नोबेल के लिए इस तरह का पागलपन कभी नहीं देखा।

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जयपुर में लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान शुक्रवार को उन्होंने कहा, मैंने अपने जीवन में ऐसा व्यक्ति नहीं देखा जो कि नोबेल पुरस्कार के पीछे इस कदर पागल हो। बता दें कि मचाडो से नोबेल लेने के बाद डोनाल्ड ट्रंप फूले नहीं समाए। इसके बाद नोबेल समिति का भी बयान सामने आया। समिति ने कहा कि इस तरह से किसी का पुरस्कार किसी अन्य को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि कैलाश सत्यार्थी को 2014 में नोबेल प्राइज मिला था। उन्होंने उस समय को याद करते हुए कहा कि वह तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने गए थे। तब उन्होंने कहा था, आप पहले भारतीय हैं जो कि भारत भूमि पर शांति का नोबेल लाए हैं। इसपर सत्यार्थी ने कहा कि यह मेडल केवल उनका नहीं बल्कि पूरे देश का है। वह इसे देश को समर्पित करना चाहते थे लेकिन इसका कोई नियम नहीं है। इसलिए उन्होंने आग्रह किया कि इस मेडल को राजघाट में महात्मा गांधी की समाधि के पास रखवा दिया जाए।

इतिहास में पहली बार ट्रांसफर किया गया है मेडल

बता दें कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब शांति का नोबेल पुरस्कार किसी विजेता ने अपनी इच्छा से किसी और को सौंप दिया। नोबेल इंस्टिट्यूट का कहना है कि नोबेल पुरस्कार देना का फैसला अंतिम और स्थायी होता है। वहीं नोबेल समितियां पुरस्कार देने के बाद विजेताओं पर कोई टिप्पणी नहीं करती। इसीलिए मारिया पर भी कोई कॉमेंट नहीं किया जाएगा।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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