इस्तीफा देने के बाद भी नहीं बचेंगे जस्टिस यशवंत वर्मा? कैश कांड में अब संसद लेगी बड़ा फैसला

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इससे पहले संसद की जांच समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि जस्टिस वर्मा अपने सरकारी आवास से मिले बेहिसाब नोटों के स्रोत का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। समिति ने पाया कि उन्होंने सबूतों से छेड़छाड़ की और जांच के दौरान सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दिए।

Justice Yashwant Varma resignation
कैश कांड में अब संसद लेगी बड़ा फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कैश कांड में फंसे जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों को संसद की समिति ने सही पाया है। हाईकोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता में बनी जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जस्टिस वर्मा अपने सरकारी आवास से मिले अधजले नौटंकी गड्डियों को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। अब खबर है कि उनके खिलाफ संसद के शीतकालीन सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। ऐसे में यह सवाल भी है कि जस्टिस वर्मा अगर अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं तो क्या फिर भी उनके खिलाफ महाभियोग चलाया जा सकता है?

इस सवाल का जवाब है हां। सरकारी सूत्रों के मुताबिक जस्टिस यशवंत वर्मा भले ही इस साल अप्रैल में पद से इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन उनके खिलाफ शुरू हुई संसदीय कार्यवाही नहीं रुकेगी। इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि जस्टिस वर्मा को पद से हटाने का प्रस्ताव उनके इस्तीफे से पहले ही स्वीकार कर लिया गया था। ऐसे में अब संसद ही उनके आचरण पर विचार करेगी और उनके पेंशन और अन्य भत्तों पर फैसला लेगी।

जस्टिस वर्मा दोषी करार

इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट 18 मई को सौंप दी थी, जिसे बुधवार को संसद में पेश किया गया। समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों पूरी तरह सही पाया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति जांच के बाद तीन मुख्य आरोपों को साबित माना।

कौन-कौन से आरोप?

पहला आरोप सरकारी आवास से बिना किसी संतोषजनक स्पष्टीकरण के बड़ी मात्रा में नोटों की गड्डियां मिलने से जुड़ा था। समिति ने पाया कि स्टोर रूम में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट मौजूद थे और यह परिसर जस्टिस वर्मा के नियंत्रण में था। वह नकदी के वहां होने और उसके मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। वहीं दूसरा आरोप सबूतों को सुरक्षित नहीं रखने से जुड़ा था। समिति ने पाया कि आग लगने के बाद घटनास्थल को पर्याप्त तरीके से सुरक्षित नहीं रखा गया। वहां मिली नकदी बाद में गायब हो गई। हालांकि, समिति ने यह नहीं कहा कि नकदी जस्टिस वर्मा ने खुद हटाई थी। तीसरा आरोप जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण से जुड़ा था। समिति ने उनके जवाबों को टालमटोल वाला और भ्रामक माना। समिति के मुताबिक, वह नकदी की मौजूदगी और बाद में सबूतों के गायब होने की संतोषजनक वजह नहीं बता सके।

इस्तीफे के बाद भी क्यों होगी कार्रवाई?

गौरतलब है कि जस्टिस वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को अपना इस्तीफा सौंप दिया था और खुद को अलग कर लिया था। हालांकि एक केंद्रीय मंत्री ने बताया, "वह प्रस्ताव अभी भी लागू है क्योंकि यह उनके इस्तीफा देने से पहले शुरू हुआ था। उनके इस्तीफे के बावजूद, संसद को उनके आचरण को ध्यान में रखना होगा और उनकी पेंशन और भत्तों पर फैसला करना होगा।"

इस्तीफे को लेकर यह है प्रक्रिया

शीर्ष कोर्ट के फैसले के अनुसार जब कोई न्यायाधीश राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंप देता है और उसकी प्रति सार्वजनिक की जाती है, तो यह माना जाता है न्यायाधीश ने इस्तीफा दे दिया है। जानकारों के अनुसार, न्यायाधीश का इस्तीफा राष्ट्रपति की स्वीकृति पर निर्भर नहीं करता। प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति औपचारिक रूप से इस्तीफा स्वीकारते हैं, जिसके बाद कानून मंत्रालय का न्याय विभाग इसकी अधिसूचना जारी करता है।

घर से मिले थे अधजले नोट

इससे पहले 14 मार्च 2025 को दिल्ली स्थित सरकारी आवास के स्टोर रूम में आग लगी थी। आग बुझाने के दौरान स्टोर रूम से बड़ी मात्रा में अधजली नोटों की गड्डियां मिलीं। इसके बाद जांच शुरू हुई। जुलाई 2025 में 200 से अधिक सांसदों ने न्यायमूर्ति वर्मा को पद से हटाने की मांग वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। 12 अगस्त 2025 में स्पीकर ओम बिरला ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने मई 2026 में रिपोर्ट ओम बिरला को सौंप दी थी।

Jagriti Kumari

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Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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