जस्टिस वर्मा पर महाभियोग के पक्ष में 208 सांसदों का लेटर, जगदीप धनखड़ ने बताया अब क्या होगा
जानकारी के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपे गए नोटिस पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद, अनुराग ठाकुर समेत कुल 145 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा राज्यसभा के 63 सांसदों ने भी प्रस्ताव पर साइन किए हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के समर्थन में कुल 208 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। सोमवार को लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के चेयरमैन को इस संबंध में प्रस्ताव सौंपे गए हैं, जिन पर जल्दी ही फैसला लिया जाएगा। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्हें न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल की ओर से जरूरी कदम उठाने की प्रक्रिया तय होगी और इस निर्णय से जल्दी ही अवगत कराया जाएगा।
जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर 14 मार्च को बड़ी संख्या में नोट बरामद हुए थे। इन नोटों में से बड़ी संख्या में ऐसे भी थे, जो आग लगने से जल गए थे। अग्निकांड की सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम को नोटों का ढेर दिखा था, जिसके बाद पुलिस को भी सूचना मिली थी। तब जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में थे और मामला सामने आने के बाद उनका इलाहाबाद ट्रांसफऱ किया गया था। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे वर्मा के खिलाफ जांच के लिए तीन जजों की एक कमेटी तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने बनाई थी। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने महाभियोग की सिफारिश वाला पत्र राष्ट्रपति और पीएम को लिखा था।
जानकारी के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपे गए नोटिस पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद, अनुराग ठाकुर समेत कुल 145 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं। प्रसाद ने कहा, ‘न्यायपालिका की ईमानदारी, पारदर्शिता और स्वतंत्रता तभी सुनिश्चित होगी, जब न्यायाधीशों का आचरण अच्छा होगा। आरोप संगीन थे और ऐसे में महाभियोग के लिए नोटिस दिया गया है। हमने आग्रह किया है कि कार्यवाही जल्द शुरू होनी चाहिए।’ राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को सौंपे गए नोटिस पर 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इस तरह कुल 208 सांसद महाभियोग के पक्ष में हैं।
कांग्रेसी सांसद बोले- दोषी पाए गए तो हटना होगा
कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने कहा कि कुल 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं और अब इस मामले की जांच होगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित न्यायाधीश को हटाया जाएगा। जस्टिस वर्मा भले ही इलाहाबाद में तैनात हैं, लेकिन उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया है। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना के आदेश पर हुई आंतरिक जांच में उन्हें दोषी ठहराया गया था।
कमेटी की रिपोर्ट में क्या, जिसके आधार पर हुई है सिफारिश
न्यायमूर्ति वर्मा ने हालांकि किसी भी गलत कार्य में संलिप्त होने से इनकार किया है, लेकिन उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला है कि न्यायाधीश और उनके परिवार के सदस्यों का उस स्टोर पर नियंत्रण था, जहां नकदी पाई गई थी। इससे यह साबित होता है कि उनका कदाचार इतना गंभीर है कि उन्हें हटाया जाना चाहिए।
लेखक के बारे में
Surya Prakashदुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सूर्यप्रकाश को पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। 10 वर्षों से ज्यादा समय से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यों से संबंधित खबरों का संपादन करते हैं एवं डेस्क इंचार्ज के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। समाचारों के त्वरित प्रकाशन से लेकर विस्तृत अध्ययन के साथ एक्सप्लेनर आदि में भी रुचि रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज प्रकाशित करने और खबरों के अंदर की खबर को विस्तार से समझाने में रुचि रखते हैं। हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को समझते हैं और उसके अनुसार ही पाठकों को खबरें देने के लिए तत्परता रखते हैं।
अकादमिक योग्यता: एक तरफ डेढ़ दशक का सक्रिय पत्रकारिता करियर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सूर्यप्रकाश अकादमिक अध्ययन में भी गहरी दिलचस्पी रखते रहे हैं। पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन और मास्टर्स की पढ़ाई के साथ ही 'हाइब्रिड वारफेयर में मीडिया के इस्तेमाल' जैसे महत्वपूर्ण एवं उभरते विषय पर पीएचडी शोध कार्य भी किया है। पत्रकारिता, समाज, साहित्य में रुचि के अलावा वारफेयर में मीडिया के प्रयोग पर भी गहरा अध्ययन किया है। इसी कारण डिफेंस स्टडीज जैसे गूढ़ विषय में भी वह रुचि रखते हैं। इस प्रकार सूर्यप्रकाश का एक लंबा पेशेवर अनुभव रहा है तो वहीं गहरी अकादमिक समझ भी रही है।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय महत्व के समाचारों में गहरी दिलचस्पी रखते हैं तो वहीं नैरेटिव वारफेयर के बारे में भी गहरा अध्ययन है। खबरों के अंदर की खबर क्या है और किसी भी समाचार के मायने क्या हैं? ऐसी जरूरी चीजों को पाठकों तक पहुंचाने में भी रुचि रखते हैं। लाइव हिन्दुस्तान में बीते 5 सालों से जुड़े हैं और गुणवत्तापूर्ण समाचार देने की मुहिम को बल प्रदान किया है। सूर्यप्रकाश को पाठकों की पसंद को समझने और उसके अनुसार समाचारों के प्रस्तुतिकरण में भी महारत हासिल है। कठिन विषयों को सरल शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने की रुचि है और इसी कारण एक्सप्लेनर आदि भी लिखते हैं।
और पढ़ें

