कैश कांड में जस्टिस यशवंत वर्मा दोषी करार, संसद में कब आएगा महाभियोग प्रस्ताव?
Justice Yashwant Varma: जस्टिस यशवंत वर्मा को तीन सदस्यीय समिति ने दोषी करार दिया है। संसद में रिपोर्ट रखे जाने के बाद उनके खिलाफ ऐक्शन की तैयारी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक उनके खिलाफ जल्दी ही महाभियोग लाया जा सकता है। हालांकि, इस मामले में एक पेच फंसा हुआ है।

Justice Yashwant Varma: कैश कांड में फंसे हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को तीन सदस्यीय समिति ने दोषी पाया है। संसद के सामने रिपोर्ट पेश करते हुए समिति ने उनके खिलाफ ऐक्शन लेने की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ होने वाली कार्यवाही को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, अप्रैल में ही राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेजने वाले जस्टिस यशवंत वर्मा पर क्या कार्यवाही होगी? इसको लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। हालांकि, सरकारी सूत्रों की मानें, तो शीतकालीन सत्र में कैश कांड के आरोपी जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने बताया कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ आगामी सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। सूत्रों ने जोर देकर कहा कि इस प्रस्ताव के दौरान जस्टिस वर्मा को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। हालांकि, इस मामले में सबसे बड़ा संवैधानिक प्रश्न यही है कि जस्टिस वर्मा अप्रैल में ही राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंप चुके हैं। ऐसे में क्या उनके खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है? चूंकि अभी भी उनका नाम इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों की सूची में शामिल है। इसलिए इस पर चर्चा तेज है।
सुप्रीम कोर्ट का 1978 वाले फैसले से फंसा पेच
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल 1978 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच द्वारा दिया गया एक फैसला भी चर्चा में है। इसमें कहा गया था कि जज के इस्तीफा सौंपते ही वह लागू हो जाता है। जज के इस्तीफे को किसी औपचारिक मंजूरी की जरूरत नहीं होती है। इस फैसले ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाने के कदम पर भी एक बहस छेड़ दी है कि क्या जज के पद छोड़ने के बाद महाभियोग लाया जा सकता है?
जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर मिले थे जले हुए नोट
यह पूरा मामला उस वक्त सामने आया था जब दिल्ली हाईकोर्ट का जज रहते हुए जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से आग लगने की घटना के दौरान बड़ी मात्रा में जला हुआ कैश बरामद हुआ था। इसके बाद उनके खिलाफ कार्यवाही तेज हो गई। सूत्रों की मानें, तो उस वक्त भी उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इसके बाद बदलते घटनाक्रम में आज तीन सदस्यीय समिति ने उनके मामले की रिपोर्ट संसद में पेश की। समिति ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों को सही करार दिया और उसके साथ ही उनके खिलाफ ऐक्शन की सिफारिश भी की।


