Hindi NewsIndia NewsJustice UU Lalit says there are Sita maiyas but there are srupnakhas as well in society
समाज में सीता मैया हैं तो शूर्पणखा भी है, शादी के नाम पर रेप मामलों को लेकर पूर्व चीफ जस्टिस

समाज में सीता मैया हैं तो शूर्पणखा भी है, शादी के नाम पर रेप मामलों को लेकर पूर्व चीफ जस्टिस

संक्षेप:

जस्टिस यूयू ललित ने कहा, ‘कई बार युवक-युवती खुले मन से रिश्ते में आते हैं। बाद में कुछ गलत हो जाता है और एक-दो साल बाद शिकायत आती है कि शादी का झांसा देकर शोषण किया गया। ऐसे मामलों में भी ग्रे एरिया होता है।’

Nov 18, 2025 10:19 am ISTNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू लालित ने एकम न्याय सम्मेलन में पुलिस और न्याय व्यवस्था की खामियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के जांच अधिकारियों को न तो सही पेशेवर उपकरण मिले हैं और न ही जरूरी शिक्षा, जिसके वे हकदार हैं। प्रकाश सिंह मामले के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने दोहराया कि जांच विंग को कानून-व्यवस्था शाखा से पूरी तरह अलग करना जरूरी है। जस्टिस लालित ने चिंता जताई कि देश में दोषसिद्धि दर कभी 20 प्रतिशत से अधिक नहीं रही। 5 में से 4 विचाराधीन कैदी अंततः बरी हो जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम निर्दोष लोगों को हिरासत में लेकर उनकी जिंदगी बर्बाद नहीं कर रहे? क्या समाज का यह कर्तव्य नहीं कि निर्दोषों को जीवनभर की परेशानी से बचाया जाए और उन्हें कानूनी-नैतिक हक दिलाया जाए?

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जस्टिस यूयू ललित ने 'एकम' न्याय की अवधारणा को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन और कार्यकर्ता दीपिका नारायण भारद्वाज का नजरिया महिला विरोधी नहीं है। समाज में सीता मैया के साथ-साथ शूर्पणखा भी हैं। इसलिए जांच तंत्र को इस तरह मजबूत करना होगा कि निर्दोषों को अदालत के चक्कर न लगाने पड़ें और वे पूरे मुकदमे से थककर हांफ न जाएं। बलात्कार जैसे मामलों में पीड़िता के बयान को सर्वोच्च सम्मान देने की मौजूदा न्यायिक मान्यता सही है। हालांकि, जस्टिस लालित ने सुझाव दिया कि अगर आरोप झूठा साबित हो तो झूठी शिकायत करने वाले को अलग से दूसरा मुकदमा चलाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। ट्रायल कोर्ट का जज खुद ही झूठे मुकदमेबाज को सजा देने का फैसला दर्ज कर सके, ऐसी सुरक्षा व्यवस्था हर स्तर पर होनी चाहिए।

'प्रॉमिस टू मैरी' रेप मामलों पर जताई चिंता

पूर्व सीजेआई ललित ने प्रेम संबंधों से उत्पन्न होने वाले 'प्रॉमिस टू मैरी' रेप मामलों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'कई बार युवक-युवती खुले मन से रिश्ते में आते हैं। बाद में कुछ गलत हो जाता है और एक-दो साल बाद शिकायत आती है कि शादी का झांसा देकर शोषण किया गया। ऐसे मामलों में भी ग्रे एरिया होता है। बिना सोचे-समझे गिरफ्तारी करके व्यक्ति की आजादी छीनना जांच के हित में नहीं होता।' अंत में जस्टिस लालित ने आयोजकों, विशेष रूप से दीपिका नारायण भारद्वाज को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एकम न्याय सम्मेलन जैसे मंच समाज की वर्तमान जरूरत हैं। यह अमृत मंथन समाज में सकारात्मक बदलाव लाएगा और न्याय के हित में काम करेगा। उन्होंने सम्मेलन को पूर्ण सफलता की शुभकामनाएं दीं।

Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

Niteesh Kumar
नीतीश 7 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024 की कवरेज कर चुके हैं। पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
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