रिटायर हो रहे हैं जस्टिस शेखर यादव, VHP कार्यक्रम में कही थी विवादित बात; मचा था बवाल
तब तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट के 13 वकीलों ने पत्र लिखा था, जिसमें जस्टिस यादव के खिलाफ FIR की मांग की गई थी। इसके बाद शीर्ष न्यायालय ने जस्टिस यादव को तलब किया और माफी मांगने के लिए कहा था, जिसे कथित तौर पर उन्होंने अस्वीकार कर दिया था।

विवादित टिप्पणी को लेकर चर्चा में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव बुधवार को रिटायर होने जा रहे हैं। खास बात है कि इसके साथ ही उनके खिलाफ जारी महाभियोग की प्रक्रिया भी रुक जाएगी। कार्यक्रम के बाद बार के सदस्यों, नागरिक समाज समूहों और राजनेताओं ने उनकी टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। साथ ही उन्हें पद से हटाने की मांग की थी।
जस्टिस यादव को 12 दिसंबर, 2019 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अपर न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 26 मार्च, 2021 को उन्हे स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। साल 2018 में तत्कालीन CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली कॉलेजियम ने जस्टिस यादव के प्रमोशन को टाल दिया था। इसके बाद फरवरी 2019 में तब सीजेआई गोगोई की कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश की थी।
क्या था विवाद
दिसंबर, 2024 में विश्व हिंदू परिषद के विधि प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाषण देने के बाद न्यायमूर्ति यादव सुर्खियों में आए थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने धार्मिक, शासन और अल्पसंख्यक समुदायों को लेकर कई विवादित टिप्पणियां की थीं। उनके इन बयानों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था और उन्हें हटाए जाने की मांग जोर पकड़ रही थी।
महाभियोग की तैयारी
तब तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट के 13 वकीलों ने पत्र लिखा था, जिसमें जस्टिस यादव के खिलाफ FIR की मांग की गई थी। इसके बाद शीर्ष न्यायालय ने जस्टिस यादव को तलब किया और माफी मांगने के लिए कहा था, जिसे कथित तौर पर उन्होंने अस्वीकार कर दिया था।
13 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में विपक्ष के सांसदों ने जस्टिस यादव के खिलाफ महभियोग लाए जाने के लिए नोटिस दिया था। उनपर हेट स्पीच के आरोप गाए गए थे। हालांकि, प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। खबर है कि राज्यसभा सचिवालय ने प्रस्ताव में 54 हस्ताक्षरों का मिलान नहीं होने की बात कही थी। इसके साथ ही वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। 2025 के मध्य तक 44 सांसदों ने अपने हस्ताक्षरों की पुष्टि की। जबकि, महाभियोग को आगे बढ़ाने के लिए 50 हस्ताक्षर की जरूरत थी।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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