
न्याय नहीं हुआ, एक्स्ट्रा की तरह बर्ताव; वंदे मातरम् पर बोले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
संसद में वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहाकि वंदे मातरम् के साथ न्याय नहीं हुआ। इसे साइडलाइन कर दिया गया।
संसद में वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहाकि वंदे मातरम् के साथ न्याय नहीं हुआ। इसे साइडलाइन कर दिया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहाकि आज जब हम राष्ट्रीय गीत की 150 वर्ष की गौरवशाली यात्रा का उत्सव मना रहे हैं तो यह सच स्वीकार करना होगा कि वंदे मातरम् के साथ जो न्याय होना चाहिए था, नहीं हुआ। उन्होंने कहाकि वंदे मातरम् अपने आप में पूरा है। लेकिन इसे अधूरा रखने की पूरी कोशिश की गई।
रक्षामंत्री ने कहाकि स्वतंत्र भारत में यह निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गीत को समान स्थान दिया जाएगा। जन गण मन, जो राष्ट्रगान है, हमारी संस्कृति का हिस्सा बन गया, लेकिन वन्दे मातरम के साथ किसी एक्स्ट्रा जैसा व्यवहार किया गया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में वन्दे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व के बारे में बात की। उन्होंने कहाकि सन 1906 में भारत का पहला ध्वज डिजाइन किया गया था। उस ध्वज के केंद्र में वन्दे मातरम् लिखा गया था, जिसे पहली बार बंगाल में फहराया गया था। अगस्त 1906 में, जनता में जागरुकता बढ़ाने के लिए वन्दे मातरम् नामक एक अखबार भी शुरू किया गया था। यह वह समय था जब वन्दे मातरम् केवल एक शब्द नहीं था, यह एक भावना, प्रेरणा का स्रोत और एक कविता थी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को लोक सभा चर्चा के दौरान बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के ‘वन्दे मातरम’ की व्याख्या पर संबोधन दिया। उन्होंने कहाकि लेखक के ‘रूपक’ अक्सर गलत समझे जाते थे, कभी अनजाने में और कभी जानबूझकर। सिंह ने कहाकि इसका यह मतलब नहीं है कि हमारे मुस्लिम भाई इन ‘रूपकों’ को नहीं समझते थे।





