क्या हम ‘बनाना रिपब्लिक’ हैं? पवन खेड़ा की जमानत पर HC में AG-सिंघवी में घंटे भर संग्राम, नहीं मिली राहत

Apr 10, 2026 02:21 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, हैदराबाद
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अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलील में कहा कि पवन खेड़ा के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित लगते हैं और ये जंगल राज और वाइल्ड वेस्ट (अराजकता) के समान हैं।

क्या हम ‘बनाना रिपब्लिक’ हैं? पवन खेड़ा की जमानत पर HC में AG-सिंघवी में घंटे भर संग्राम, नहीं मिली राहत

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत अर्जी पर तेलंगाना हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई होगी और संभवत: फैसला सुनाया जाएगा। खेड़ा ने यह याचिका असम पुलिस द्वारा दर्ज जालसाजी और आपराधिक साजिश के एक मामले में अग्रिम जमानत पाने के लिए दायर की थी। खेड़ा की तरफ से वर्चुअली पेश हुए कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार द्वारा दर्ज मामले में राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया।

सिंघवी ने अपनी दलील में कहा कि खेड़ा के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित लगते हैं और ये "जंगल राज" और "वाइल्ड वेस्ट" (अराजकता) के समान हैं। बार एंड बेंच के मुताबिक, सिंघवी ने अपनी दलील में कहा, “क्या हम 'वाइल्ड वेस्ट' में रह रहे हैं, जहाँ इस तरह की शिकायत के लिए मुझे गिरफ़्तार करना पड़ेगा? FIR में हर मुमकिन आरोप लगाया गया है। आरोप यह है कि मैंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आपके खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए। सिर्फ़ मुझे परेशान करने के लिए आपने हर मुमकिन आरोप इसमें जोड़ दिया है।”

मैं एक राजनीतिक विरोधी हूँ

सिंघवी ने आगे कहा, "मैं एक राजनीतिक विरोधी हूँ। अगर आप इस तरह लोगों को गिरफ़्तार करना शुरू कर देंगे, तो यह 'जंगल राज' के अलावा और कुछ नहीं होगा।" इस पर असम सरकार की तरफ से पेश राज्य के महाधिवक्ता (AG) देवजीत सैकिया ने सिंघवी के इन दावों का खंडन किया और खेड़ा पर जालसाजी का आरोप लगाया। सैकिया ने यह भी पूछा कि खेड़ा तेलंगाना हाई कोर्ट क्यों आए, जबकि वे दिल्ली में रहते हैं और मामला असम में दर्ज किया गया है। सैकिया ने खेड़ा की याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि कोई राजनीतिक प्रतिशोध नहीं है और याचिका तेलंगाना उच्च न्यायालय में विचारणीय नहीं है।

क्या असम एक बनाना रिपब्लिक है?

उन्होंने अदालत से पूछा कि क्या असम एक बनाना रिपब्लिक है? कि खेड़ा यहां नहीं आ सकते। उन्होंने कहा, "ऐसा कोई संकेत नहीं है कि वे असम नहीं आ सकते। असम कोई 'बनाना रिपब्लिक' (अराजक देश) नहीं है। उनकी जान को कोई खतरा नहीं है।" इस पर सिंघवी ने कहा कि वहां जंगलराज है, असम वाइल्ड वेस्ट बन गया है। दोनों के बीच करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक गरमागरम बहस होती रही। बाद में जस्टिस के. सुजाना ने इस पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया। खेड़ा के वकील पोन्नम अशोक गौड़ ने कहा कि शुक्रवार को आदेश सुनाया जा सकता है।

खेड़ा के दिल्ली आवास पर गई थी असम पुलिस

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, असम पुलिस 7 अप्रैल को खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर गई थी, लेकिन वे वहाँ मौजूद नहीं थे। दरअसल, असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ कथित मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साज़िश का मामला दर्ज किया है। यह मामला उनके हालिया दावों के बाद दर्ज किया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां हैं।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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