मुकदमों का बोझ बढ़ा और कम हो गए जज, हाई कोर्ट में ही खाली हैं 342 जजों के पद
देशभर की अदालतों पर मुकदमों का बोझ बढ़ा है और वहीं जजों की संख्या कम हो गई है। हाई कोर्ट में ही जजों के 342 पद खाली हैं। नियुक्ति प्रक्रिया में देरी की वजह से जनता को भी नुकसान हो रहा है।

प्रभात कुमार
देशभर की अदालतों में मुकदमों का भार बढ़ता जा रहा है, पर न्याय की कमान संभालने वाले जजों की कुर्सियां खाली पड़ी हुई हैं। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, हाई कोर्ट्स में जजों के 342 पद रिक्त हैं।
रिक्त पदों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले 38 बढ़ गई है। वहीं, जिला अदालतों में यह आंकड़ा 7,000 के पार पहुंच चुका है। इससे जहां अदालतों पर मुकदमों का बोझ बढ़ रहा है, वहीं आम जनता को भी न्याय के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
हाई कोर्ट में 342 जजों के पद खाली
देशभर के सभी हाईकोर्ट में जजों के कुल स्वीकृत 1122 पद हैं। चार अगस्त, 2026 तक इन पदों के सापेक्ष कुल 780 जज कार्यरत हैं, यानी 342 पद रिक्त हैं। इससे पहले 2025 में उच्च न्यायालयों में कार्यरत जजों की संख्या 818 थी। यानी पिछले साल के मुकाबले इस साल 38 जज और कम हो गए। राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर, 2025 तक उच्च न्यायालयों में लंबित मुकदमों की संख्या 63,70,904 थी। वहीं, 2026 में अब तक 64,76,727 मामले लंबित हैं। यानि एक साल में मुकदमों की संख्या में 1,05,000 की बढ़ोतरी हुई है।
नियुक्ति प्रक्रिया की धीमी रफ्तार बड़ी वजह
जजों की कमी के पीछे नियुक्ति प्रक्रिया की धीमी रफ्तार बड़ी वजह बनी हुई है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में सभी उच्च न्यायालयों में कुल 157 जजों की नियुक्ति हुई थी। वहीं, 2026 में (जनवरी से 10 अगस्त तक) महज 52 जजों की नियुक्ति की जा सकी है।
जिला अदालतों में एक साल में 2300 खाली पद बढ़े
दूसरी ओर, जिला अदालतों में भी जजों के खाली पद लगातार बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड के आंकड़ों के मुताबिक देशभर की जिला अदालतों में 5,09,97,000 मामले लंबित हैं।
सरकार बोली- नियुक्ति न्यायालय की जिम्मेदारी
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने कहा, हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति अनुच्छेद 217 व 224 के तहत और 1998 में तैयार मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर में बताई प्रक्रिया अनुसार होती है। सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव का जिम्मा मुख्य न्यायाधीश का है। हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए यह जिम्मेदारी संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की होती है।


