
विरोध का तरीका है, JNU में 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी' नारों पर बोले कांग्रेस नेता
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस नेता ने कहा, 'इनके साथ अन्याय तो हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण रहा है। कितने दिनों तक चार्जशीट नहीं दी जाएगी और ट्रायल नहीं शुरू होगा। यह पक्षपात तो है ही।'
JNU में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर लगाए गए विवादित नारों को कांग्रेस नेता उदित राज ने 'राजनीतिक भाषा' करार दिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसा तो लंबे समय से चला रहा है और अन्य जगहों पर भी होता है। यूनिवर्सिटी के कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें एक समूह 'मोदी शाह की कब्र खुदेगी' की नारेबाजी कर रहा है। सोमवार को दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उदित राज ने कहा, 'एक तो यह नारा है और विरोध करने का तरीका है। एक राजनीतिक भाषा है, इसका शाब्दिक अर्थ नहीं लेते हैं। जेएनयू में काफी इसका आक्रोश है।' उन्होंने कहा, 'देखिए भाषा होती है, जब मॉब होता है। और जगहों पर भी होता है। और आज से नहीं लंबे समय से चल रही हैं ऐसी बातें।'
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस नेता ने कहा, 'इनके साथ अन्याय तो हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण रहा है। कितने दिनों तक चार्जशीट नहीं दी जाएगी और ट्रायल नहीं शुरू होगा। यह पक्षपात तो है ही।'
क्या है नारेबाजी का मामला
पीटीआई के अनुसार, उमर और शरजील को जमानत नहीं दिए जाने के फैसले के बाद जेएनयू में नारे लगाए गए। कथित वीडियो सोमवार रात का बताया जा रहा है, जिसमें समूह में मौजूद लोग 'मोदी शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर' जैसे नारे लगा रहे हैं।
छात्र संघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि 5 जनवरी 2020 के कैम्पस में हुई हिंसा के विरोध में हर साल प्रदर्शन किया जाता है। उन्होंने कहा, 'विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारे पूरी तरह से वैचारिक थे और किसी पर भी व्यक्तिगत हमला नहीं किया गया था। ये किसी के भी खिलाफ नहीं लगाए गए थे।'
पुलिस का कहना है कि नारेबाजी को लेकर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। इधर, भारतीय जनता पार्टी ने नारों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।





