राम मंदिर ट्रस्ट के पास कितना रुपया है, नए CEO जीतेंद्र मिश्रा करेंगे 5 बड़े काम

हिन्दुस्तान टीम, लखनऊ
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उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर की देखरेख करने वाले ट्रस्ट में बड़े विवादों के बीच अहम बदलाव हुआ है। ट्रस्ट के CEO यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति हुई है।

Who is Jeetendra Mishra New CEO
रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बन गए हैं।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के करीब छह साल बाद राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। सीईओ के पद पर एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र की नियुक्ति का सफर सामान्य प्रशासनिक जरूरत से शुरू होकर चढ़ावे की चोरी के विवाद, एसआईटी जांच और व्यवस्था में खामियों की पड़ताल से गुजरते हुए यहां तक पहुंचा है। इस नियुक्ति से राम मंदिर के संचालन का पूरा मॉडल बदल जाएगा।

अब तक ट्रस्ट पदाधिकारी, समितियां और अलग-अलग अधिकारी मिलकर मंदिर की व्यवस्थाएं संभालते रहे हैं। सीईओ के आने के बाद नीति और क्रियान्वयन के बीच स्पष्ट विभाजन, विभागवार जवाबदेही, वित्तीय निगरानी, कर्मचारी प्रबंधन, श्रद्धालु सुविधाओं और परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए एक केंद्रीकृत कार्यकारी व्यवस्था बनने की संभावना है।

यहां से शुरू हुई CEO पर चर्चा

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट से गिनती कक्ष में निगरानी की कमियों और चढ़ावे में सेंध की घटनाओं से जुड़े कई तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में गिनती कक्ष में प्रवेश करने वाले लोगों की निगरानी, सीसीटीवी व्यवस्था और प्रक्रिया संबंधी कमियों की ओर इशारा किया गया। यहीं से यह सवाल और मजबूत हुआ कि इतने बड़े धार्मिक संस्थान का रोजमर्रा का संचालन क्या केवल ट्रस्ट पदाधिकारियों और विभिन्न समितियों के स्तर पर चलता रहे या इसके लिए एक पूर्णकालिक पेशेवर कार्यकारी तंत्र बनाया जाए। सीईओ व्यवस्था का सबसे अहम पहलू धार्मिक और प्रशासनिक अधिकारों का स्पष्ट विभाजन होगा।

सीईओ के आने पर क्या बदलेगा

सीईओ के आने के बाद सबसे बड़ा बदलाव जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था में हो सकता है। अभी किसी बड़े काम के लिए ट्रस्ट, समितियों और संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय की जरूरत होती है। सीईओ व्यवस्था में रोजमर्रा के संचालन के लिए एक प्रमुख कार्यकारी अधिकारी होगा।

राम मंदिर सीईओ के पांच बड़े काम

चढ़ावे का प्रबंधन- दान और चढ़ावे में गड़बड़ी को रोकने के लिए अकाउंटिंग सिस्टम लागू करेंगे। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की मदद लेंगे।

दो हजार कर्मचारियों का सुपरविजन- मंदिर की सुरक्षा, सफाई और मैनेजमेंट में तैनात होने वाले लगभग 1500 से 2000 कर्मियों का सुपरविजन करेंगे।

इंफ्रास्ट्रक्चर का रखरखाव- राम मंदिर परिसर के बचे हुए निर्माण कार्य पूरे कराना। सीसीटीवी नेटवर्क को दुरुस्त रखेंगे। ट्रस्ट के फैसलों को ग्राउंड पर लागू करेंगे।

श्रद्धालुओं की सहूलियत और क्राउड मैनेजमेंट- लाखों श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन कराना। त्योहारों पर पुलिस-प्रशासन के साथ मूवमेंट का प्लान बनाएंगे।

ट्रस्ट बोर्ड और सरकार के बीच कोऑर्डिनेशन- सीईओ मंदिर ट्रस्ट बोर्ड और उसके चेयरमैन के अधीन होंगे। वे ट्रस्ट और राज्य सरकार, पुलिस-प्रशासन के बीच कोऑर्डिनेटर की तरह काम करेंगे।

ट्रस्ट के खाते में 1882 करोड़

मणिराम दास छावनी में हुई बैठक के दौरान ट्रस्ट के वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक लेखा-जोखा भी रखा गया। रखे गए विवरण के अनुसार वर्ष के दौरान करीब 237 करोड़ की आय हुई, जबकि व्यय 91 करोड़ हुए। निर्माण समेत विभिन्न कार्यों पर करीब 425 करोड़ रुपये व्यय बताया गया। बैठक में 21 मार्च 2026 तक ट्रस्ट के बैंक खातों में करीब 1882 करोड़ रुपये की राशि होने की जानकारी भी दी गई।

Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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