ये दामाद हैं क्या? 3D पर शुभेंदु अधिकारी की नई वॉर्निंग से बांग्लादेश सीमा पर भारी अफरा-तफरी, हड़कंप

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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सरकार के संदिग्ध घुसपैठियों के लिए जिला स्तर पर 'होल्डिंग सेंटर' बनाने के फैसले के बाद हिरासत में लेने के बढ़ते डर के बीच बुधवार को भी पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर सीमा नाके पर सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिकों की भीड़ जमा देखी गई।

ये दामाद हैं क्या? 3D पर शुभेंदु अधिकारी की नई वॉर्निंग से बांग्लादेश सीमा पर भारी अफरा-तफरी, हड़कंप

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ने की अपनी मुहिम को और तेज कर दिया है और अपनी 3D पॉलिसी यानी 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' के समर्थन में कहा है कि उनकी सरकार अब राज्य के सभी 23 जिलों में होल्डिंग सेंटर यानी डिटेंशन सेंटर बनाएगी। मुख्यमंत्री ने सभी अवैध घुसपैठियों को दो टूक चेतावनी दी है, "जल्दी-जल्दी भागो, नहीं तो जो करना है सरकार करेगी।" मुख्यमंत्री की इस नई वॉर्निंग से बांग्लादेश से सटे सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप मचा हुआ है और अवैध घुसपैठियों में अफरा तफरी मची हुई है।

"ये दामाद हैं क्या?"

मुख्यमंत्री अधिकारी ने घुसपैठियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए पिछली सरकार यानी ममता बनर्जी की सरकार पर भी हमला बोला और कहा कि अब अवैध घुसपैठियों को महीनों या सालों तक जेल में रखकर सरकारी राशन (चावल, दाल, मछली, दवाइयां) खिलाने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, “क्या ये दामाद हैं?”

BSF को सौंपे जाएंगे घुसपैठिए

बता दें कि नई प्रक्रिया के तहत, पुलिस अब संदिग्ध घुसपैठियों को अदालत में पेश कर लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझाने के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप देगी ताकि बांग्लादेशी सीमा रक्षकों (BGB) के साथ समन्वय कर उन्हें वापस उनके देश भेजा जा सके। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जो लोग 31 दिसंबर 2024 के बाद भारत आए हैं और CAA के दायरे में नहीं आते, वे अवैध घुसपैठिया माने जाएंगे।

जिला स्तर पर 'होल्डिंग सेंटर' बनाने का फैसला

दूसरी तरफ, राज्य सरकार के संदिग्ध घुसपैठियों के लिए जिला स्तर पर 'होल्डिंग सेंटर' बनाने के फैसले के बाद हिरासत में लेने के बढ़ते डर के बीच बुधवार को भी पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर सीमा नाके पर सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिकों की भीड़ जमा देखी गई। बशीरहाट अनुमंडल के स्वरूपनगर इलाके में आने वाली इस सीमा पर तड़के से ही एक दिन पहले जैसे नजारे देखने को मिले। यहां लोग बांग्लादेश सीमा पार करने के मौके के इंतजार में बैग, ट्रॉली और अपना दूसरा साजो-सामान लेकर लंबी कतारों में खड़े थे।

सीमा पर भारी भीड़

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बुधवार दोपहर तक करीब 35 से 40 लोग अब भी सीमा के पास इंतजार कर रहे थे, जबकि आस-पास के इलाकों से और अधिक लोगों के आने की रिपोर्टें मिल रही थीं। वहां जुटे लोगों में से कई ने यह बात स्वीकार की कि वे पिछले कुछ वर्षों में एजेंटों और दलालों की मदद से अवैध रूप से भारत में घुसे थे और देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे थे। अब संभावित गिरफ्तारी या हिरासत के डर से वे खुद अपनी मर्जी से बांग्लादेश लौटने की कोशिश कर रहे हैं।

चादरें बिछा कर रहे इंतजार

स्थानीय सूत्रों ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों और पुलिस प्रशासन का मंगलवार को हकीमपुर सीमा के पास 200 से अधिक संदिग्ध घुसपैठियों से सामना हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक, डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले, कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए उन्हें इलाके के तीन अस्थायी होल्डिंग सेंटरों में भेजा गया था। नाके के पास इंतजार कर रहे लोग अस्थायी शेडों के नीचे शरण लेते दिखायी दिये, जबकि अन्य लोगों ने सीमा पार करने की अनुमति मिलने का इंतजार करते हुए सड़कों के किनारे और खुले स्थानों पर प्लास्टिक की चादरें बिछा रखी थीं। पिछले साल अक्टूबर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान भी ऐसे ही नजारे देखने को मिले थे।

30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है

ताजा घटनाक्रम राज्य सरकार के उस हालिया निर्देश की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें संदिग्ध घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को हिरासत में रखने के लिए हर जिले में 'होल्डिंग सेंटर' बनाने की बात कही गयी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन केंद्रों में लोगों को 30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है। जिन लोगों के खिलाफ पहले से ही कानूनी कार्रवाई चल रही है या जो डिपोर्ट होने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें भी इन्हीं केंद्रों में रखा जायेगा।

प्रशासन के कड़े रुख से पलायन तेज

रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार के इस कदम से कई सीमावर्ती जिलों में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे निवासियों के बीच डर पैदा हो गया है, जिसके चलते गहन सत्यापन अभियान शुरू होने से पहले ही कई लोग खुद अपनी मर्जी से देश छोड़कर जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घुसपैठ पर प्रशासन के कड़े रुख ने पलायन को और तेज कर दिया है। कल्याणी के एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में मंगलवार को आयोजित एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए सरकार की थ्रीडी 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' की नीति को दोहराया।

रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पकड़े गए घुसपैठियों को अब लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा और इसके बजाय उन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा पार भेजने के लिए सीधे बीएसएफ को सौंपा जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि देश में घुसपैठियों की देखरेख पर जनता का पैसा खर्च नहीं किया जाना चाहिए। इस बीच सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती इलाकों, खासकर उत्तर 24 परगना में निगरानी तेज कर दी है। एजेंसियों को अंदेशा है कि आने वाले दिनों में बिना वैध दस्तावेजों वाले और भी प्रवासी चोरी-छिपे भारत छोड़ने की कोशिश कर सकते हैं।

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Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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