जयशंकर पश्चिम एशिया की स्थिति पर लोकसभा में देंगे बयान, कल से बजट सत्र का दूसरा चरण
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्र में हवाई मार्ग के आंशिक रूप से खोले जाने के बाद 52,000 से अधिक भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं। पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति नाजुक बनी हुई है क्योंकि अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से ईरानी ठिकानों पर लगातार बमबारी कर रहे।

विदेश मंत्री एस जयशंकर पश्चिम एशिया की स्थिति के संबंध में सोमवार को लोकसभा में बयान देंगे। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू होगा। रविवार शाम को जारी लोकसभा की नौ मार्च की संशोधित कार्यसूची के अनुसार, ''डॉ. एस. जयशंकर पश्चिम एशिया की स्थिति के संबंध में एक बयान देंगे।''
शनिवार तक, लोकसभा अध्यक्ष पद से ओम बिरला को हटाने की मांग वाला विपक्ष समर्थित प्रस्ताव ही सोमवार के लिए सूचीबद्ध एकमात्र आधिकारिक एजेंडा था। विपक्ष ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदन में चर्चा की मांग की है।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्र में हवाई मार्ग के आंशिक रूप से खोले जाने के बाद 52,000 से अधिक भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं। पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति नाजुक बनी हुई है क्योंकि अमेरिका और इजराइल संयुक्त रूप से ईरानी ठिकानों पर लगातार बमबारी कर रहे हैं, जबकि तेहरान पूरे क्षेत्र में इजराइली ठिकानों और अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले करके जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
बता दें कि ईरान पर इजरायल और अमेरिका ने मिलकर 28 फरवरी को हमला किया था, जिसमें सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई की मौत हो गई थी। इसके बाद मिडिल ईस्ट में जंग बढ़ गई। ईरान ने यूएई, बहरीन, कुवैत समेत कई जगह ड्रोन और मिसाइल से हमले किए। ईरान उन ठिकानों को निशाना बना रहा है, जहां पर अमेरिकी बेस हैं। इस बीच, अमेरिका और इजरायल ने ईरान के तेल रिफाइनरियों और डिपो पर भीषण हमला किया।
तेहरान के स्थानीय निवासियों के अनुसार तेल डिपो के जलने से उठा धुआं इतना घना था कि ऐसा लग रहा है मानो 'सूरज पूरी तरह गायब हो गया हो'। तेल डिपो के पास की सड़कों, दुकानों और घरों में बेहद भयावह और डरावनी आग पर काबू पाने के लिए कर्मचारियों को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा। ईरान ने इन हमलों का जवाब देते हुए कुवैत में 'पब्लिक इंस्टीट्यूशन फॉर सोशल सिक्योरिटी' की बहुमंजिला सरकारी इमारत को ड्रोन से निशाना बनाया। इस हमले के कारण इमारत में भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए स्थानीय अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। गत 28 फरवरी को ईरान पर शुरू हुए हमले में बीते एक सप्ताह में 1200 नागरिकों की मौत हो चुकी है।
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