Explainer: लाखों श्रद्धालु, हजारों सुरक्षाकर्मी... फिर भी जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा में क्यों मची अफरा-तफरी?
पुरी की विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा आज शुरू हुई। इस यात्रा के दौरान मौसम और भीड़ की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई है। कई श्रद्धालुओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लाखों लोग इस यात्रा को देखने के लिए देश-विदेश से आए हैं।

Jagannath Puri Rath Yatra: ओडिशा के विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ जी की आज रथ यात्रा निकली। हजारों सुरक्षाकर्मियों और महीने की तैयारी के बाद भी आलम यह रहा कि एक श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि कई दर्जनों लोग अस्पताल पहुंच गए। हालांकि, सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत ही राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया, जिसकी वजह से कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर लोगों को भीड़ में दबने के कारण सांस लेने में समस्या हुई है। घायलों को तुरंत ही अस्पताल ले जाया गया है, जहां पर उन्हें मेडीकल सहायता दी जा रही है।
तमाम व्यवस्थाओं के बाद भी श्रद्धालु की मौत ने एक बार फिर से सवाल उठा दिए हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है? आखिर क्यों भगवान जगन्नाथ की यात्रा को पूरी तरह से दुर्घटना से मुक्त नहीं बनाया जा सकता? इसका जवाब यात्रा के तरीके और लोगों की भक्ति में ही छिपा हुआ है। आइए जानते हैं उस जगन्नाथ रथ यात्रा के बारे में जो केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जिसमें हर साल लाखों लोग शामिल होते हैं।
12वीं सदी की ऐतिहासिक यात्रा, विदेशों से आते भक्त
इस यात्रा को पुरी की शान कहा जाता है। हर साल लाखों भक्त एक समय पर एक जगह पर आकर अपने आराध्य की भक्ति करते हैं। लेकिन यात्रा के दौरान ही सबसे बड़ी चुनौती सामने आ जाती है। लाखों की भीड़ और दूसरी तरफ सभी लोग रथों की तरफ आगे बढ़ते नजर आते हैं। लकड़ी से बने हुए इन बड़े बड़े-बड़े रथों की गति अप्रत्याशित होती है। इसकी वजह से कई बार लोग घबरा जाते हैं।
रस्सी को खींचने की होड़
भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ हर साल यात्रा पर निकलते हैं। इनके अपने-अपने रथ होते हैं, जिन्हें भक्त खींचते हैं। विशालकाय रथों को मजबूत रस्सियों के साथ खींचा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी इन रस्सियों को स्पर्श करता है या रथ को खींचने में मदद करता है। उसके सभी पाप धुल जाते हैं। इसी विश्वास के कारण हजारों लोग एक साथ रथ के करीब जाने की कोशिश करते हैं। इसकी वजह से कितनी भी सुरक्षा की स्थिति में अव्यवस्था फैलने का डर बना ही रहता है।
भारी उमस और गर्मी का मौसम
इस यात्रा का समय जुलाई के बीचों-बीच पड़ता है। तटीय क्षेत्र में होने की वजह से यहां पर भारी बारिश और उसके बाद उमस की स्थिति बनती है। लाखों लोगों की भीड़ जब ऐसे मौसम में जुटती है, तो लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी कारण बन जाती है। ऐसे मौसम में लोगों में सामान्य अवस्था में पानी की कमी हो जाती है, जब यात्रा के बीच इतनी भीड़ के बीच में कोई होता है, तो उसकी स्थिति भयावह हो जाती है।
आज भी जब रथ यात्रा शुरु हुई थी, तो उसके पहले पुरी में पिछले 45 घंटों में जमकर बारिश हुई है। स्थानीय अधिकारी के मुताबिक पहले उन्होंने लोगों को भीड़ से निकालने पर ध्यान दिया क्योंकि उमस की वजह से लोग फंसे हुए थे। इसके अलावा वह लगातार निचले इलाकों से पानी को निकाल रहे हैं, ताकि यात्रा को सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सके।
अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा नाकाफी
लाखों की भीड़ जब एक जगह पर उपस्थित होती है। तो उसके लिए सुरक्षा इंतजाम कितने भी हों कम ही नजर आते हैं। पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए भी यही कहानी साबित होती दिखती है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य का रथ खींचने की कोशिश करते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों को भी उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। इसी रथ यात्रा की बात करें, तो सरकार ने करीब 12 हजार पुलिसकर्मियों सीआरपीएफ की टीमें और 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी इस व्यवस्था में लगे हुए हैं।
इसके अलावा भीड़ पर नजर रखने के लिए एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों को भी इंस्टॉल किया गया हैष लेकिन इसके बाद भी भीड़ को पूरी तरह से नियंत्रित कर पाना आसान नहीं होता है। क्योंकि लाखों लोगों की भीड़ तीनों रथों के साथ बेहद करीब से होकर गुजरती है, जिससे एक छोटी सी जगह पर कुछ ही मिनटों में खतरनाक दबाव उत्पन्न हो जाता है। इसे संभालना आसान नहीं होता है।
भीड़ को नियंत्रित करने के सरकारी प्रयास
ओडिशा की शान इस यात्रा को हर साल सुरक्षित रूप से करवाने के लिए प्रशासन जी जान से जुटा रहता है। हर साल कुछ न कुछ नया किया जाता है, जिससे श्रद्धालुओं की जान को बचाया जा सके। इस साल भी प्रशासन ने यात्रा के मार्ग में पहले से ही 30 विशेष निकासी मार्ग तैयार किए थे। आपातकालीन स्थिति में इन रास्तों से एंबुलेंस निकालने और लोगों को निकालने की व्यवस्था होनी थी। यह काफी हद तक काम भी आए। जिन 200 लोगों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। वह इन्हीं रास्तों की वजह से बचाए जा सके हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों की मानें तो यह व्यवस्था केवल आपातकाल के लिए है। इससे लोगों की सुरक्षा को बढ़ाने का कोई प्रयास नजर नहीं आता है। यात्रा के लिए एक ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें इमरजेंसी हालात की जरूरत ही न पड़े।


