जब्त कीजिए Bacca Bucci के जूते, HC ने क्यों नियुक्त किए स्थानीय कमिश्नर? विवाद क्या

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Bacca Bucci vs Skechers: कोर्ट द्वारा नियुक्त आयुक्तों को व्यापक अधिकार दिए गए हैं, जिनमें दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा स्थित परिसरों का निरीक्षण करने से लेकर संदिग्ध जूतों, पैकेजिंग और मार्केटिंग सामग्री की जब्ती करना तक शामिल है।

जब्त कीजिए Bacca Bucci के जूते, HC ने क्यों नियुक्त किए स्थानीय कमिश्नर? विवाद क्या

Bacca Bucci vs Skechers: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक दिलचस्प और अहम बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) विवाद के मामले में अंतरिम आदेश जारी करते हुए मशहूर टीवी शो 'शार्क टैंक' फेम Bacca Bucci के उन जूतों की बिक्री पर रोक लगा दी है, जिनका डिजाइन Skechers जैसा है। कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश चर्चित फुटवियर ब्रांड Bacca Bucci और वैश्विक कंपनी Skechers के आमने-सामने आने के बाद दिए हैं। अदालत ने पाया कि ये जूते Skechers के लोकप्रिय “Go Walk 5” मॉडल के डिज़ाइन से “लगभग समान” या “भ्रामक रूप से मिलते-जुलते” दिखते हैं।

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस तुषार राव गेडेला ने Skechers को एकतरफ़ा अंतरिम रोक (ex-parte interim injunction) का आदेश दिया और उल्लंघन करने वाले उत्पादों को ज़ब्त करने के लिए स्थानीय कमिश्नरों की नियुक्ति की। अंतरिम निषेधाज्ञा (injunction) जारी करते हुए कोर्ट ने स्थानीय आयुक्तों को कथित रूप से डिजायन उल्लंघन करने वाले उत्पादों को जब्त करने का भी अधिकार दिया। हाई कोर्ट ने पाया कि ये डिज़ाइन "लगभग एक जैसे/भ्रम पैदा करने वाले रूप से समान" दिखते हैं, और कहा कि इससे ग्राहक गुमराह हो सकते हैं।

Skechers के आरोप क्या हैं?

Skechers USA और उसकी सहयोगी कंपनियों ने Bacca Bucci Fashions के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि Bacca Bucci ने उनके "Go Walk 5" जूतों के सोल (तले) के डिज़ाइन की नकल की है। Skechers का कहना है कि उन्होंने “Go Walk 5” जूतों के midsole और outsole डिज़ाइन का पंजीकरण कराया हुआ है और यह उत्पाद 2019 में भारत में लॉन्च किया गया था। कंपनी का दावा है कि Bacca Bucci ने उनके जूतों के विशेष फीचर्स की नकल की है।

कंपनी के मुताबिक, घोड़े की नाल (horseshoe) जैसी आकृति, सेगमेंटेड पैटर्न, असममित ब्लॉक्स को हूबहू कॉपी किया गया है, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। इस मामले में Skechers ने अगस्त 2025 में Bacca Bucci को cease-and-desist नोटिस भेजा था, और बाद में रिमाइंडर भी दिया। लेकिन कंपनी के कथित रूप से अनुपालन न करने पर मामला अदालत तक पहुंचा।

कोर्ट के कड़े निर्देश

बार एंड बेंच के मुताबिक, अब अदालत ने Bacca Bucci को आदेश दिया है कि वह विवादित डिज़ाइन वाले जूतों का निर्माण और बिक्री तुरंत बंद करे। इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी इनका प्रचार-प्रसार रोके। बाजार से ऐसे उत्पाद वापस (recall) ले और अपनी सप्लाई चेन की पूरी जानकारी साझा करे। कोर्ट ने ये बी कहा है कि Bacca Bucci इन जूतों से हुई कमाई का ब्यौरा भी दे।

छापेमारी और जब्ती के आदेश

कोर्ट द्वारा नियुक्त आयुक्तों को व्यापक अधिकार दिए गए हैं, जिनमें दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा स्थित परिसरों का निरीक्षण करने से लेकर संदिग्ध जूतों, पैकेजिंग और मार्केटिंग सामग्री की जब्ती करना तक शामिल है। इसके अलावा Bacca Bucci के खातों, इनवॉइस और बिक्री रिकॉर्ड की जांच करना और उनकी फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग करने का भी अधिकार दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता लेने और ताले तोड़ने की भी अनुमति है।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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