जब DK शिवकुमार ने अमित शाह का प्लान कर दिया था फेल; RS चुनाव में 44 MLAs संग किया था बड़ा खेल
जब राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग होने लगी, तब उन विधायकों को गांधीनगर लाया गया था। इन 44 में से 43 विधायकों ने अहमद पटेल को वोट दिया था जबकि एक ने क्रॉस वोटिंग की थी लेकिन जब मतों की गिनती शुरू हुई तो हाई वोल्टेज ड्रामा होने लगा।

बात अगस्त 2017 की है। गुजरात में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने थे। भाजपा ने अमित शाह और स्मृति ईरानी को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस ने सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को पांचवी बार राज्यसभा में भेजने के लिए उम्मीदवार बनाया था। उधर, भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने ठान लिया था कि अहमद पटेल को इस बार संसद नहीं पहुंचने देना है। इसके लिए जो सियासी चक्रव्यूह रचा गया था, उसमें कांग्रेस के ही बागी विधायक बलवंत सिंह राजपूत को अहमद पटेल के खिलाफ खड़ा कर दिया था।
उस वक्त गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के 51 विधायक थे। इनमें से छह विधायकों ने शंकर सिंह बाघेला के साथ बगावत कर दी थी। इनमें से तीन ने भाजपा का दामन थाम लिया था। उन्हें में से एक विधायक बलवंत सिंह राजपूत थे, जिन्हें भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में उतार दिया था। बाकी 44 विधायकों को तब कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार गांधीनगर से ले उड़े थे और उन्हें बेंगलुरु में अपने रिजॉर्ट में ठहराया था। डीके ने उन विधायकों की खूब मेहमाननवाजी की थी।
काउंटिंग में हाई वोल्टेज ड्रामा
जब राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग होने लगी, तब उन विधायकों को गांधीनगर लाया गया था। इन 44 में से 43 विधायकों ने अहमद पटेल को वोट दिया था जबकि एक ने क्रॉस वोटिंग की थी लेकिन जब मतों की गिनती शुरू हुई तो हाई वोल्टेज ड्रामा होने लगा और आधी रात तक गिनती रोकनी पड़ी। आखिरकार मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा। आयोग ने देर रात दो कांग्रेसी विधायकों को वोट रद्द कर दिए। वोटिंग के दौरान कांग्रेस ने अपने दो बागी विधायकों (राघवजी पटेल और भोलाभाई गोहेल) पर अपने मत पत्र भाजपा के पोलिंग एजेंट को दिखाने का आरोप लगाया।
अहमद पटेल को मिले 44 वोट
इस पर देर रात तक चले मैराथन विचार-विमर्श के बाद, चुनाव आयोग ने नियमों के उल्लंघन के आधार पर उन दोनों वोटों को रद्द कर दिया। इस तरह रात दो बजे घोषित चुनाव परिणाम में अहमद पटेल को कुल 44 वोट मिले और उनकी जीत हुई जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी बलवंत सिंह राजपूत को 43 वोट मिले। जीत के लिए अब 45 की जगह कुल 44 वोटों की ही दरकार थी। माना जाता है कि जेडीयू के विधायक ने अहमद पटेल के पक्ष में मतदान किया था, जिससे उनकी संख्या 44 हो गई।
अमित शाह की रणनीति पर पानी फेरा
इस तरह अहमद पटेल की रणनीति और डीके शिवकुमार की रिजॉर्ट पॉलिटिक्स ने अमित शाह की रणनीति पर पानी फेर दिया था। इस जीत के बाद अमहद पटेल ने तब ट्वीट कियाथा, 'सत्यमेव जयते'। उन्होंने कहा था, ''यह केवल मेरी जीत नहीं है बल्कि शर्मनाक तरीक़े से पैसे, बाहुबल और सरकारी मशनरियों के दुरुपयोग की हार भी है।"
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लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


