इस्तीफा दो और... बागी सांसदों को TMC की खुली चुनौती; सुखेंदु का नाम लेकर कल्याण बनर्जी की नसीहत
TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को अपने बागी सांसदों को कड़ा चेतावनी भरा संदेश देते हुए कहा कि अगर पार्टी से मतभेद हैं तो नैतिकता दिखाते हुए लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दें, और जहां जाना है चले जाएं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मंगलवार को अपने बागी सांसदों को कड़ा चेतावनी भरा संदेश देते हुए कहा कि अगर उन्हें पार्टी की नीतियों और नेतृत्व से मतभेद हैं तो नैतिकता का पालन करते हुए लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दें। इसके बाद जहां जाना है, चले जाएं। पार्टी नेतृत्व ने बागी सांसदों पर भाजपा से गुप्त सांठगांठ, राजनीतिक नैतिकता की कमी और संकट के समय पार्टी कार्यकर्ताओं को छोड़कर भाग जाने का गंभीर आरोप लगाया। यह तीखा हमला उस बागी गुट के दावे के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसने सोमवार को दावा किया था कि टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 20 सांसद एनडीए के साथ हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं। बागी गुट ने यह भी कहा था कि वे जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर एनडीए का खुला समर्थन घोषित करेंगे।
टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी मुख्यालय में बुलाई गई विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी समूह की जमकर आलोचना की। बनर्जी ने कहा कि अगर आप पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं, पार्टी की छवि खराब कर रहे हैं और उसके खिलाफ जाकर काम कर रहे हैं तो नैतिकता दिखाइए और सांसद पद से इस्तीफा दे दीजिए। यह नैतिक रूप से सही रास्ता है। बनर्जी ने आगे कहा कि पार्टी से असंतोष रखने वाले नेताओं को पार्टी के भीतर रहकर नुकसान पहुंचाने की बजाय बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय का उदाहरण देते हुए कहा कि सुखेंदु ने पार्टी के खिलाफ आरोप लगाए और फिर इस्तीफा दे दिया। उन्होंने नैतिकता का उदाहरण पेश किया। बागी सांसदों को भी उनका अनुसरण करना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने भी बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'पार्टी के साथ विश्वासघात' करने का आरोप लगाया। आजाद ने कहा कि अगर आप भाजपा के साथ जाना चाहते हैं तो इसे खुलकर स्वीकार कीजिए। पार्टी का नाम इस्तेमाल करके पीछे से खेलने की कोशिश न कीजिए। यह साफ-साफ धोखा है। कीर्ति आजाद ने विशेष रूप से काकोली घोष दस्तीदार पर निशाना साधते हुए उनके चुनावी रिकॉर्ड और पार्टी में भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जो संकट के समय पार्टी को छोड़ देते हैं, वे कभी भी टीएमसी के सच्चे कार्यकर्ता नहीं हो सकते।
वहीं, कल्याण बनर्जी ने बागी गुट द्वारा जारी किए गए कथित पत्र की प्रामाणिकता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतना महत्वपूर्ण दस्तावेज, जिसमें 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया गया है, अभी तक सार्वजनिक रूप से जारी क्यों नहीं किया गया? क्या यह सिर्फ मीडिया में हवा बनाने की कोशिश है? बनर्जी ने आरोप लगाया कि बागी सांसद प्रभावी रूप से भाजपा के साथ खड़े हो चुके हैं।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ सांसद अब अपनी राजनीतिक निष्ठा बदल चुके हैं। वे ममता बनर्जी को छोड़कर नरेंद्र मोदी के साथ चले गए हैं। टीएमसी नेताओं ने यह भी कहा कि बागी गुट के इस कदम से पार्टी कार्यकर्ताओं में गुस्सा है और संकट के समय जब पार्टी को मजबूती की जरूरत थी, तब ये लोग भाजपा के संपर्क में थे।
बता दें कि सोमवार को काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट ने दावा किया था कि टीएमसी के अधिकांश लोकसभा सांसद उनके साथ हैं और वे एक अलग गुट के रूप में मान्यता मांगने की तैयारी कर रहे हैं। इस दावे ने पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी थी।
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लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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