इसी साल गगनयान लॉन्चिंग की भी तैयारी, बड़ी सफलता के बाद ISRO ने बताया अपना प्लान
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट तक अपना उपग्रह पहुंचाकर इसरो ने दुनियाभर में अपना लोहा मनवाया है। अब इसरो चीफ वी नारायण का कहना है कि इसी साल मानवरहित गगनयान मिशन भी लॉन्च किया जाएगा।

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट तक ‘ईओएस-05’ उपग्रह को पहुंचाकर भारत ने अंतरिक्ष में ताकत का लोहा मनवाया है। आसमान से पृथ्वी पर उपग्रह से नजर रखने की यह क्षमता केवल अमेरिका और चीन ही हासिल कर सके हैं। भारत इस क्लब का तीसरा देश बन गया है। इसरो ने बताया कि प्रक्षेपण के ठीक 18 मिनट रॉकेट ने उपग्रह को ‘सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट’ में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। जिस ऊंचाई पर रॉकेट पहुंचा है, वह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (36000 किलोमीटर) से लगभग 5000 किलोमीटर नीचे है। यहां से उपग्रह अपनी निर्धारित अंतिम कक्षा के लिए खुद अपना सफर शुरू करेगा।
उच्चतम बिंदु से आगे पहुंचा
रॉकेट को उपग्रह को जीटीओ में 28,934 किमी के उच्चतम बिंदु तक पहुंचाना था, लेकिन रॉकेट ने 2,092 किमी अतिरिक्त दूरी तय कर ली, जिससे उपग्रह 31,026 किमी तक पहुंचा।
अब तक का सर्वाधिक पेलोड
जीएसएलवी-एफ17 ने जिस ईओएस-05 उपग्रह को तय कक्षा तक पहुंचाया, उसका वजन 2367 किलोग्राम है, यह किसी जीएसएलवी रॉकेट द्वारा उठाया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड रहा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख वी नारायणन ने शुक्रवार को कहा कि इस कैलेंडर वर्ष के दौरान पहले मानवरहित गगनयान मिशन के प्रक्षेपण के लिए तेजी से व्यवस्थित काम किया जा रहा है। नारायणन ने कहा कि जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 का प्रक्षेपण इस वित्त वर्ष में इसरो की पहली सफलता है। इसरो की टीम उद्योग जगत और अन्य संगठनों के साथ मिलकर पहले मानवरहित गगनयान मिशन पर काम कर रही है।
नारायणन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस वित्त वर्ष में नौवहन उपग्रह एनवीएस-03 समेत छह और प्रक्षेपण का लक्ष्य है। उन्होंने इस बात को खारिज किया कि यह एक जासूसी उपग्रह है। बता दें कि थॉमस कुरियन इस प्रक्षेपण अभियान के निदेशक और इम्तियाज अहमद परियोजना निदेशक हैं।
दो नाकामियों का सामना किया
इसरो का ‘जीएसएलवी-एफ10/ ईओएस-03’ अभियान 12 अगस्त 2021 को क्रायोजेनिक चरण में आई तकनीकी खराबी के कारण यह अभियान असफल हो गया था। यह उपग्रह (जिसे पहले जीआईसैट-1 के नाम से जाना जाता था) भारत का पहला जियो-इमेजिंग उपग्रह बनने वाला था। वहीं, 12 जनवरी 2026 को पीएसएलवी-सी62/ ईओएस-एन1 मिशन का प्रक्षेपण किया गया था। तीसरे चरण के अंत में नियंत्रण प्रणाली में खराबी के कारण रॉकेट निर्धारित उड़ान पथ से भटक गया और नाकाम रहा।
जांच के बाद बदलाव
इसरो ने इस नाकामी को सीख के तौर पर लेकर अगले अभियान के लिए जरूरी बदलाव किए। आठ माह बाद शुक्रवार को ‘ईओएस-05’ के प्रक्षेपण से न सिर्फ इस नाकामी को धोया, बल्कि एक नया इतिहास रच दिया।
अंतरिक्ष में भारत की क्षमता बढ़ी : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पहले इमेजिंग सैटेलाइट के सफल लॉन्च की तारीफ की और कहा कि यह देश के लिए गर्व का पल है। उन्होंने कहा कि इसरो ने नवाचार और उत्कृष्ट तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए अंतरिक्ष इकोसिस्टम में भारत को खास पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘ईओएस-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट तक ले जाने वाले जीएसएलवी-एफ17 का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की उत्कृष्टता, इनोवेशन और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।’


