
भारत के बाहुबली रॉकेट ने लॉन्च किया अमेरिकी सैटेलाइट, अंतरिक्ष में कैसे करेगा काम
इसरो ने अपने सबसे भारी प्रक्षेपण यान LVM3 के जरिए अमेरिकी संचार सैटेलाइट BlueBird Block-2 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह मिशन स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को सीधे उच्च गति की ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करेगा, जो अंतरिक्ष में संचार के नए युग की शुरुआत है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को एक विशेष कॉमर्शियल मिशन के तहत अपने सबसे भारी प्रक्षेपण यान एलवीएम3-एम6 के जरिए एक अमेरिकी सैटेलाइट को लॉन्च किया। इसरो ने इसकी जानकारी देते हुए कहा है कि अमेरिकी कम्युनिकेशन सैटेलाइट ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 (BlueBird Block-2) को सफलतापूर्वक ऑर्बिट में स्थापित कर दिया गया है। इसमें दो शक्तिशाली S200 सॉलिड बूस्टर लगे हैं।
24 घंटे की उलटी गिनती पूरी होने के बाद 43.5 मीटर ऊंचा रॉकेट सुबह 8.55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित दूसरे लॉन्च पैड से शानदार तरीके से उड़ान भरा।
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि 6,100 किलोग्राम वजनी यह संचार उपग्रह एलवीएम3 के प्रक्षेपण इतिहास में पृथ्वी की निम्न कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया जाने वाला अब तक सबसे भारी पेलोड बन गया। इससे पहले सबसे भारी पेलोड एलवीएम3-एम5 संचार उपग्रह-03 था, जिसका वजन करीब 4,400 किलोग्राम था और जिसे इसरो ने दो नवंबर को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था।

बुधवार का यह मिशन ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनएसआईएल) और अमेरिका स्थित एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए वाणिज्यिक समझौते के तहत संचालित किया गया। एनएसआईएल, इसरो की वाणिज्यिक इकाई है। प्रक्षेपण से इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने 22 दिसंबर को तिरुमला में श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा अर्चना की थी।
अंतरिक्ष में कैसे करेगा काम?
यह ऐतिहासिक मिशन अगली पीढ़ी का ऐसा संचार उपग्रह स्थापित करेगा, जिसे दुनिया भर में स्मार्टफोन को सीधे उच्च गति वाली सेल्युलर ब्रॉडबैंड सेवा देने के लिए डिजाइन किया गया है। एएसटी स्पेसमोबाइल पहला और एकमात्र अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क बना रहा है, जो सीधे स्मार्टफोन के माध्यम से सुलभ होगा और वाणिज्यिक और सरकारी दोनों ऐप्लीकेशन के लिए डिज़ाइन किया गया है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, 43.5 मीटर ऊंचा एमवीएम3 तीन चरणों वाला रॉकेट है, जिसमें क्रायोजेनिक इंजन लगा है। इसे इसरो के ‘लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर’ ने विकसित किया है। प्रक्षेपण के लिए आवश्यक अत्यधिक 'थ्रस्ट' प्रदान करने के लिए इस प्रक्षेपण यान में दो एस200 ठोस रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं, जिन्हें विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम ने विकसित किया है। प्रक्षेपण के लगभग 15 मिनट बाद ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ उपग्रह के रॉकेट से अलग होने की उम्मीद है।
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन का उद्देश्य उपग्रह के जरिए सीधे मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। यह नेटवर्क कहीं भी, कभी भी, सभी के लिए 4जी और 5जी वॉयस-वीडियो कॉल, संदेश, स्ट्रीमिंग और डेटा सेवाएं उपलब्ध कराएगा।
एएसटी स्पेसमोबाइल ने सितंबर 2024 में ब्लूबर्ड-1 से 5 तक पांच उपग्रह प्रक्षेपित किए थे, जो अमेरिका और कुछ अन्य देशों में निरंतर इंटरनेट कवरेज प्रदान कर रहे हैं। कंपनी ने अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ऐसे और उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है और दुनिया भर के 50 से अधिक मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी की है।

लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
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