सात महीने से 'खामोश' इसरो, नहीं भरी कोई उड़ान; कब शुरू होगी धमाकेदार लॉन्चिंग?
ISRO Launch Mission: 7 महीने बाद फिर गरजेगा ISRO का रॉकेट, सितंबर में GISAT-1A की उड़ान। 7 महीने के ब्रेक के बाद ISRO सितंबर में GISAT-1A लॉन्च करने की तैयारी में है। इसके बाद नवंबर में NVS-03 मिशन संभावित है।

ISRO Launch Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) करीब सात महीने से शांत है। कोई उड़ान नहीं भरी गई। लेकिन अब इसरो एक बड़े अंतराल के बाद एक बार फिर अपने लॉन्च अभियान शुरू करने जा रहा है। अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट GISAT-1A को सितंबर के पहले सप्ताह में लॉन्च किए जाने की तैयारी है। यह उन दो सैटेलाइट्स में शामिल है जो कई महीनों से श्रीहरिकोटा स्थित स्पेसपोर्ट पर लॉन्च का इंतजार कर रहे हैं। दूसरा सैटेलाइट NVS-03 है। अधिकारियों के मुताबिक, लगातार सामने आई तकनीकी दिक्कतों के बाद ISRO ने अपने लॉन्च रोक दिए थे।
GISAT-1A क्यों है खास?
GISAT-1A को जियो इमेजिंग सैटेलाइट कहा जाता है और नई नामकरण व्यवस्था के तहत EOS-05 भी कहा जाता है। यह साल 2021 में लॉन्च किए गए GISAT-1 यानी EOS-03 का रिप्लेसमेंट सैटेलाइट है। GISAT-1 अपनी तय कक्षा में नहीं पहुंच पाया था क्योंकि रॉकेट का अंतिम प्रोपल्सिव सेगमेंट इग्नाइट नहीं हो सका था।
नया GISAT-1A 10 साल की मिशन लाइफ के लिए डिजाइन किया गया है। इसका इस्तेमाल बड़े क्षेत्रों की बार-बार तस्वीरें लेने के लिए किया जाएगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के साथ-साथ कृषि और वानिकी पर भी नजर रखने में मदद मिलेगी।
NVS-03 की लॉन्चिंग नवंबर में संभावित
GISAT-1A के बाद NVS-03 को लॉन्च किए जाने की संभावना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह सैटेलाइट श्रीहरिकोटा में ईंधन से लैस होकर तैयार है और इसे नवंबर में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।
NVS-03 की लॉन्चिंग इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले मिशन में NVS-02 को उसकी तय मंजिल तक नहीं पहुंचाया जा सका था। इसके बाद भारत का NavIC नेविगेशन सिस्टम स्वतंत्र रूप से नेविगेशन डेटा उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं है।
जनवरी में फेल हुआ था PSLV-C62 मिशन
इस साल ISRO ने अब तक सिर्फ एक लॉन्च किया है। 12 जनवरी को ISRO के भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल PSLV के जरिए EOS-N1 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित किया जाना था। यह मिशन PSLV-C62/EOS-N1 था, लेकिन रॉकेट के तीसरे चरण में आई एक “एनोमली” के कारण मिशन नाकाम हो गया। इस घटना की जांच करने वाली फेलियर एनालिसिस कमेटी की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
2025 में भी दो मिशनों को झटका लगा
साल 2025 में ISRO ने कुल पांच लॉन्च किए थे। इनमें PSLV-C61 के जरिए अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-9 को कक्षा में पहुंचाने का मिशन भी शामिल था। यह मिशन भी रॉकेट के तीसरे चरण में आई एक “एनोमली” के कारण विफल हुआ था। ISRO ने कहा था कि दोनों घटनाओं में सामने आई एनोमली एक-दूसरे से संबंधित नहीं थीं। हालांकि, इस मिशन की फेल्योर एनालिसिस रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इसके अलावा दो GSLV मिशन हुए। इनमें GSLV-F16 के जरिए NASA के साथ मिलकर विकसित किए गए NISAR सैटेलाइट का लॉन्च सफल रहा। वहीं GSLV-F15 से NVS-02 को लॉन्च किया गया, लेकिन ऑर्बिट बढ़ाने की प्रक्रिया विफल रहने के कारण सैटेलाइट अपनी तय मंजिल तक नहीं पहुंच सका। GSLV-F15 ने सामान्य रूप से काम किया था, लेकिन इस घटना की जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसके अलावा LVM3 के जरिए कम्युनिकेशन सैटेलाइट Bluebird-2 और CMS-03 के दो लॉन्च किए गए थे।
लॉन्च लक्ष्य से पीछे ISRO
ISRO की हालिया वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 के लिए 15 मिशन और 2026-27 के लिए 27 मिशन का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि मौजूदा लॉन्च संख्या इस लक्ष्य से काफी पीछे है। ISRO लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट को अलग-अलग मिशन के तौर पर गिनता है, लेकिन इस हिसाब से भी संख्या लक्ष्य से कम है।
2025-26 के लिए ISRO ने कम से कम:
- चार अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट
- एक कम्युनिकेशन सैटेलाइट
- एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर
- गगनयान कार्यक्रम के तहत तीन लॉन्च और स्पेसक्राफ्ट मिशन
- PSLV, GSLV और LVM3 के कम से कम दो-दो मिशन
की योजना बनाई थी।
वहीं 2026-27 के लिए नए SSLV के कम से कम पांच लॉन्च का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा चार PSLV, तीन GSLV और एक LVM3 मिशन की योजना है। गगनयान कार्यक्रम के तहत भी कम से कम चार मिशन निर्धारित किए गए हैं।


