पीएम मोदी चले गए, उसके बाद ईरान पर हमले का फैसला लिया; बार-बार सफाई क्यों दे रहा इजरायल?
इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने बताया कि पीएम मोदी के इजरायल दौरे के दौरान उन्हें ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले की जानकारी क्यों नहीं दी गई थी। पढ़ें भारत-इजरायल कूटनीति और ईरान में सत्ता परिवर्तन पर पूरी रिपोर्ट।

मार्च की शुरुआत में ही मध्य पूर्व में एक बड़ा संघर्ष छिड़ गया, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए। यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमताओं और क्षेत्रीय मिलिशिया समर्थन को निशाना बनाकर किया गया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या हो गई और तेहरान व इस्फहान सहित कई प्रमुख शहरों पर हवाई हमले किए गए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस घटना का एक प्रमुख पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा से जुड़ा है, जहां मोदी 25-26 फरवरी को इजरायल में थे और हमला उनके जाने के ठीक दो दिन बाद हुआ। इस हमले की सटीक टाइमिंग को लेकर अंतरराष्ट्रीय और भारतीय राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। विवाद और अफवाहों को बढ़ता देख इजरायल को अब बार-बार आगे आकर यह स्पष्टीकरण देना पड़ रहा है कि इस सैन्य कार्रवाई का पीएम मोदी के दौरे से कोई संबंध नहीं था।
इजरायली राजदूत के बाद अब इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा के दौरान उन्हें ईरान पर होने वाले हमलों के बारे में कोई पूर्व जानकारी (ब्रीफिंग) नहीं दी जा सकी थी। रायसीना डायलॉग में वर्चुअली हिस्सा लेते हुए उन्होंने इसके पीछे के कारणों और भारत-इजरायल संबंधों पर खुलकर बात की।
पीएम मोदी के दौरे के बाद लिया गया हमले का फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की दो दिवसीय यात्रा की थी, जो 26 फरवरी को समाप्त हुई थी। विदेश मंत्री सार ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और पीएम मोदी के साथ इजरायल के शानदार संबंध हैं, जो पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। उन्होंने जानकारी न दे पाने का कारण बताते हुए कहा- हम प्रधानमंत्री मोदी को इस बारे में सूचित नहीं कर सके क्योंकि सैन्य कार्रवाई का अंतिम निर्णय उनके जाने के बाद यानी शनिवार तड़के लिया गया था।
अमेरिका-इजरायल का संयुक्त हमला और खामेनेई की मौत
पीएम मोदी की यात्रा समाप्त होने के ठीक दो दिन बाद ही, इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया। इस ऐतिहासिक और घातक हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए।
हमले की मुख्य वजहें और 'अस्तित्व पर मंडराते खतरे'
इजरायली विदेश मंत्री ने इस कड़े कदम के पीछे कई प्रमुख कारण बताए। उन्होंने संकेत दिया कि हमले का यह फैसला तब लिया गया जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पूरी तरह से टूट गई। इजरायली मंत्री के अनुसार, ईरान के खिलाफ इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन अस्तित्व के खतरों को जड़ से खत्म करना है जो ईरान की ओर से लगातार पैदा किए जा रहे थे।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और नई बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है। इसके अलावा, ईरान द्वारा हिजबुल्लाह, हमास और हूती विद्रोहियों जैसे संगठनों को दिया जा रहा समर्थन भी इस हमले का एक बड़ा कारण बना। स्थिति की गंभीरता और भविष्य की रणनीति पर बोलते हुए गिदोन सार ने एक बड़ा संकेत दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा- संभवतः अब हमें ईरान में सत्ता परिवर्तन देखना होगा।
इजरायल बार-बार सफाई क्यों दे रहा है?
भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा से शांति और मध्य पूर्व में संतुलन की कूटनीति का पक्षधर रहा है। इजरायल यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके एक अहम 'रणनीतिक साझीदार' भारत पर यह आरोप न लगे कि वह ईरान के खिलाफ किसी सैन्य योजना का मौन समर्थक था। हमले के तुरंत बाद भारत में इस मुद्दे ने बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने पीएम मोदी की 'चुप्पी' पर सवाल उठाए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पीएम का इजरायल दौरा और उसके तुरंत बाद ईरान पर हमला अमेरिका-इजरायल की किसी बड़ी योजना का हिस्सा हो सकता है। इजरायल इन अफवाहों पर विराम लगाकर यह स्पष्ट करना चाहता है कि भारत की इसमें कोई भूमिका नहीं थी।
सोशल मीडिया की '48 घंटे की थ्योरी' का खंडन
सोशल मीडिया पर यह अफवाह तेजी से फैली कि जब तक पीएम मोदी इजरायल में थे, तब तक युद्ध को अघोषित रूप से 'पॉज' पर रखा गया। इजरायल इस नैरेटिव को तोड़ना चाहता है कि यह कोई पूर्व-निर्धारित टाइमलाइन थी। इजरायली विदेश मंत्री से पहले भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने स्पष्ट किया था कि ईरान पर हमला कोई पूर्व-निर्धारित योजना नहीं थी। उन्होंने बताया कि यह एक ऑपरेशनल अवसर था, जो पीएम मोदी के जाने के बाद खुफिया जानकारी के आधार पर सामने आया। हमले की अंतिम मंजूरी शनिवार सुबह ही इजरायली सुरक्षा कैबिनेट से ली गई थी।
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