मोदी को दी विदाई, फिर शुरू हुई ईरान की तबाही; इजरायल ने बताया आखिर क्यों चुना गया 'सही समय'
इजरायली राजदूत रुवेन अजार ने स्पष्ट किया है कि ईरान पर हमला पीएम मोदी के लौटने के बाद मिला एक 'ऑपरेशनल अवसर' था, कोई पूर्व योजना नहीं। जानें F-35, आयरन बीम और इस घातक इजरायली-अमेरिकी हमले की पूरी इनसाइड स्टोरी।

भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने कहा है कि ईरान पर हाल ही में किए गए इजरायली और अमेरिकी हमले किसी पूर्व निर्धारित योजना का हिस्सा नहीं थे। उन्होंने बताया कि यह हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल से रवाना होने के तुरंत बाद मिले एक ऑपरेशनल अवसर का नतीजा था। इसके पीछे इजरायल की दशकों की खुफिया और सैन्य तैयारियों का अहम योगदान है।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा और हमले की टाइमिंग
26 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। इस दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया और 17 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस हाई-प्रोफाइल यात्रा के ठीक दो दिन बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया।
'द इंडियन एक्सप्रेस' को दिए इंटरव्यू में इजरायली दूत ने साफ किया कि पीएम मोदी की यात्रा के दौरान इस संभावित हमले के बारे में इजरायल को खुद भी जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा- जाहिर है, पीएम मोदी के साथ हमारी बातचीत में क्षेत्रीय विकास पर चर्चा हुई, लेकिन जो बात हमें खुद नहीं पता थी, उसे हम साझा नहीं कर सकते थे। यह एक ऑपरेशनल अवसर था जो पीएम मोदी के जाने के बाद ही सामने आया। हमले की मंजूरी शनिवार सुबह ही सुरक्षा कैबिनेट से ली गई थी।
दशकों की तैयारी और खुफिया निवेश
राजदूत ने बताया कि ईरान से मिल रही धमकियों के कारण इजरायल ने अपनी सैन्य और खुफिया क्षमताओं को बढ़ाने के लिए पिछले कई वर्षों में अरबों डॉलर का निवेश किया है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरानी शासन की कार्यप्रणाली, उनकी सैन्य मशीनरी, निर्णय लेने वालों की पहचान और उनकी लोकेशन को सटीक रूप से समझना था। ईरान और उसके प्रॉक्सी गुटों द्वारा दागी जाने वाली मिसाइलों और रॉकेटों को रोकने के लिए इजरायल ने नई तकनीकें विकसित कीं ताकि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को भेदा जा सके।
हथियार, तकनीक और अमेरिका के साथ समन्वय
इस बड़े हमले और रक्षा अभियान में इजरायल और अमेरिका ने मिलकर काम किया। 'अब्राहम समझौते' की बदौलत इजरायल मध्य पूर्व में हवाई निगरानी और सैन्य अभियानों के लिए अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ समन्वय करने में सक्षम हुआ। क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की भारी मौजूदगी ने इस अभियान को और ताकत दी। इसकी मदद से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों, उत्पादन स्थलों और साइलो पर भारी बमबारी की गई। इसमें अमेरिका की विशेष 'बंकर बस्टर' क्षमताओं का भी इस्तेमाल हुआ। इस ऑपरेशन में इजरायल ने अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-35 और F-16 के संयोजन का इस्तेमाल किया।
आयरन बीम: यह एक नई लेजर रक्षा प्रणाली है, जिसने ड्रोन और रॉकेट के खतरों से निपटने में बहुत मदद की है।
एरो 3 और डेविड्स स्लिंग: इन उन्नत प्रणालियों का इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए किया जा रहा है।
AI का इस्तेमाल: इन सभी प्रणालियों को एक साथ जोड़ने और रीयल-टाइम में सटीक निर्णय लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उच्च प्रशिक्षित अधिकारियों की मदद ली जाती है।
एक दर्दनाक हादसा
हमलों की बात करते हुए अजार ने एक दुखद घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि हालांकि इजरायल ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर देता है, लेकिन एक बैलिस्टिक मिसाइल ने इजरायल में एक नागरिक आश्रय स्थल (शेल्टर) पर सीधा प्रहार किया, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई।
ईरान का भविष्य और सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भविष्य पर अजार ने इजरायल का रुख स्पष्ट किया। अजार ने कहा- भविष्य में ईरान पर कौन शासन करेगा, यह हम तय नहीं करेंगे। यह फैसला ईरानी लोगों को करना है। इजरायल ने मुख्य रूप से ईरान के सैन्य और 'बसीज' ठिकानों को निशाना बनाया है, ताकि ईरानी शासन की जनता को डराने-धमकाने की क्षमता खत्म हो सके।
ईरानी जनता का समर्थन
ईरान में हमलों से पहले हुए विरोध प्रदर्शनों में इजरायल की जमीनी संलिप्तता के सवाल पर अजार ने कहा कि उनके पास सीमित संसाधन हैं और उनका पहला फोकस अपनी आत्मरक्षा पर है। हालांकि, उन्होंने कहा- ईरानी लोग आजादी के हकदार हैं... हमें उम्मीद है कि हमने ईरानियों को जो थोड़ी-बहुत मदद दी है, उससे वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपने देश की स्थिति को बदलेंगे।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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