फेसबुक वाली 'वो' निकली पाकिस्तानी एजेंट! वॉट्सऐप नंबर मांगते ही युवक ने पकड़ा पूरा खेल
जम्मू के डोडा जिले में फेसबुक पर कश्मीरी महिला बनकर युवक को हनीट्रैप में फंसाने की ISI की बड़ी साजिश नाकाम हो गई है। +92 नंबर देखते ही युवक ने सुरक्षाबलों की जानकारी देने से मना कर दिया। पढ़ें पूरी कहानी।

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की एक बड़ी साजिश नाकाम हो गई है। आईएसआई ने एक स्थानीय युवक को हनीट्रैप में फंसाकर उससे सुरक्षाबलों की संवेदनशील जानकारी निकलवाने की कोशिश की। हालांकि, करीब 35 साल के इस युवक ने पाकिस्तानी एजेंसी के पैसों के लालच और धमकियों के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया। सुरक्षा एजेंसियों को पाकिस्तान से आने वाली वॉट्सऐप कॉल्स इंटरसेप्ट करने के बाद इस मामले की भनक लगी, जिसके बाद उन्होंने युवक के घर पर छापेमारी कर उसे हिरासत में ले लिया। हालांकि, कड़ी पूछताछ और बैकग्राउंड चेक के बाद जब यह साफ हो गया कि युवक ने देश के खिलाफ कोई काम नहीं किया है, तो उसे छोड़ दिया गया।
बर्फबारी के वीडियो पर कमेंट से शुरू हुई थी दोस्ती
इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखा कि यह पूरा मामला पिछले साल दिसंबर में शुरू हुआ। युवक ने फेसबुक पर अपने इलाके में हुई बर्फबारी का एक वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो पर एक शख्स ने कमेंट किया, जिसने खुद को कश्मीर की रहने वाली एक महिला बताया था। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई और वे फेसबुक पर लगातार मैसेज एक्सचेंज करने लगे। यह सिलसिला कई महीनों तक चलता रहा। मार्च में उस महिला ने युवक से उसका वॉट्सऐप नंबर मांग लिया।
+92 कोड देखते ही खुला पाकिस्तानी साजिश का राज
युवक को उस कथित महिला की असलियत का पता तब चला जब वॉट्सऐप पर आए मैसेज में +92 का कंट्री कोड दिखा, जो पाकिस्तान का है। यह देखते ही युवक ने जब महिला से सवाल-जवाब किए, तो उसने उसे पैसों का लालच देना शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी कॉलर ने युवक को भीतरी इलाकों (हिंटरलैंड) और सीमा पर सुरक्षाबलों की तैनाती की तस्वीरें भेजने के बदले मोटी रकम देने की पेशकश की।
लालच और धमकियों के बाद भी नहीं आया झांसे में
पाकिस्तानी साजिश को समझते ही युवक ने तुरंत उस नंबर को ब्लॉक कर दिया। इसके बाद भी उसे अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल्स और मैसेज आते रहे, जिनमें प्रलोभन और धमकियां दोनों शामिल थीं। पुलिस के मुताबिक, सुरक्षाबलों के रडार पर आने और पकड़े जाने से पहले ही युवक ने ऐसे करीब एक दर्जन नंबरों को ब्लॉक कर दिया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि युवक का ब्रेनवॉश (कट्टरपंथी) नहीं किया जा सका था और उसने सभी लालच और धमकियों का डटकर सामना किया। युवक की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसकी पहचान गुप्त रखी गई है, हालांकि एहतियात के तौर पर वह अभी भी पुलिस की निगरानी में रहेगा।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
आईएसआई द्वारा जम्मू-कश्मीर के युवाओं को इस तरह 'हनीट्रैप' में फंसाकर संवेदनशील जानकारियां जुटाने का यह पहला मामला नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले ही पुलिस और सेना की संयुक्त टीम ने मकवाल के रहने वाले 23 साल के एक युवक को पकड़ा था। यह युवक स्कूल ड्रॉपआउट था और स्नैपचैट के जरिए आईएसआई की एक महिला ऑपरेटिव के जाल में फंसकर पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था।
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Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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