मोटी चमड़ी रखो, हिंदू लड़की का मुस्लिम से विवाह देश का ताना बाना खराब कर रहा है क्या; सुप्रीम कोर्ट ने पूछा

Feb 25, 2026 01:16 pm ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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अदालत ने कहा कि घूसखोर का अंग्रेजी में मतलब भ्रष्ट होता है। ऐसे में एक समुदाय से गलत बात जोड़ी जा रही थी। कोर्ट ने कहा, 'इस केस में ऐसी कोई भी गलत बात यादव समाज से नहीं जोड़ी गई है।' उन्होंने कहा कि यह नाम किसी भी तरह से यादव समुदाय को गलत तरह से नहीं दिखा रहा है।

मोटी चमड़ी रखो, हिंदू लड़की का मुस्लिम से विवाह देश का ताना बाना खराब कर रहा है क्या; सुप्रीम कोर्ट ने पूछा

'Yadav Ji ki love story' फिल्म के खिलाफ दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने खारिज कर दिया है। याचिका के जरिए विश्व यादव समाज ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। कोर्ट का कहना है कि फिल्म के नाम में ऐसा कोई भी शब्द नहीं है, जो यादव समुदाय की खराब छवि पेश कर रहा हो। इस दौरान अदालत ने हाल ही में घूसखोर पंडत के मामले में दिए फैसले का भी जिक्र किया।

याचिका में फिल्म बैन की मांग

याचिका में कहा गया था कि फिल्म का नाम यादव समाज की एक आपत्तिजनक तस्वीर बना रहा है। साथ ही दावा किया गया कि फिल्म में दिखाया गया है कि यादव समाज से आने वाली एक हिंदू लड़की मुस्लिम पुरुष के प्रेम में पड़ जाती है। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील का कहना था कि फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है।

सुप्रीम कोर्ट नहीं हुआ सहमत

याचिका पर जस्टिस बीवी नागरत्न और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच सुनवाई कर रही थी। बेंच ने सवाल किया, 'हिंदू लड़की का मुस्लिम लड़के से शादी करना देश के ताने बाने को खराब कर रहा है।'

बेंच ने कहा, 'हमने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री देखी है। मुख्य शिकायत यह है कि आने वाली फिल्म का नाम समाज में यादव समुदाय की छवि खराब करता है। इसलिए तर्क दिया जा रहा है कि फिल्म का नाम बदला जाना चाहिए। हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि किसी फिल्म का शीर्षक किसी समुदाय को गलत तरीके से कैसे पेश कर सकता है। फिल्म के शीर्षक में कहीं भी ऐसा कोई शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को खराब रोशनी में दिखाता हो। ये आशंकाएं पूरी तरह से निराधार हैं।'

दूसरी फिल्म का किया जिक्र

अदालत ने कहा कि घूसखोर का अंग्रेजी में मतलब भ्रष्ट होता है। ऐसे में एक समुदाय से गलत बात जोड़ी जा रही थी। कोर्ट ने कहा, 'इस केस में ऐसी कोई भी गलत बात यादव समाज से नहीं जोड़ी गई है।' उन्होंने कहा कि यह नाम किसी भी तरह से यादव समुदाय को गलत तरह से नहीं दिखा रहा है।

इस दौरान बेंच ने बेंडिट क्वीन फिल्म का भी जिक्र किया। बेंच ने कहा, 'बेंडिट क्वीन फिल्म में वो कह रहे थे कि गुज्ज समुदाय को गलत तरीके से दिखाया गया है। तब इस कोर्ट ने कहा था कि नहीं ऐसा नहीं है।'

कोर्ट ने कहा, 'मोटी चमड़ी रखें। यह काल्पनिक है। एक सप्ताह में सब खत्म हो जाएगा। कोई भी आजकल थियेटर नहीं जा रहा है। सभी फोन पर देख रहे हैं।'

Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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