कल्याण बनर्जी का अगला नंबर? क्या सबसे खास भी छोड़ेंगे साथ; पिता-पुत्र क्यों बिगड़े
पेशे से वकील लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर की है। इस लिस्ट में उनके बेटे का नाम भी शामिल हो गया है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह भी पार्टी छोड़ सकते हैं।

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों के निशाने पर हैं। गुरुवार को सांसद कल्याण बनर्जी कह चुके हैं कि पार्टी में वह रहेंगे या अभिषेक। उनके वकील पुत्र भी जमकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और आत्मसम्मान की बात कर रहे हैं। हालांकि, इसपर अब तक ममता बनर्जी की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके साथ ही अटकलें तेज हो गईं हैं कि कल्याण भी बागी गुट में शामिल हो सकते हैं।
क्या बोले कल्याण बनर्जी
कल्याण बनर्जी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, 'दीदी को मेरे और अभिषेक बनर्जी के बीच फैसला करना होगा।' जब उनसे पूछा गया कि क्या वे पार्टी छोड़ने का संकेत दे रहे हैं, तो वरिष्ठ वकील ने स्पष्ट किया, 'अगर अभिषेक बनर्जी उसी पद और उसी ताकत के साथ पार्टी में बने रहते हैं, तो मैं तृणमूल कांग्रेस में नहीं रहूंगा।' दरअसल, यह विवाद ऐसे समय पर हुआ है जब अभिषेक सिग्नेचर विवाद में घिरे हुए हैं और कल्याण उनकी पैरवी कर रहे हैं। बाद में इस मामले में वकील बदल दिया गया।
वकील बदलने पर हुए नाराज
बनर्जी ने कहा, 'मैं ऐसा अहंकार बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं पिछले 45 सालों से वकालत के पेशे में हूं और मैं इस तरह के रवैये को कतई स्वीकार नहीं करूंगा। जिनकी बात की जा रही है, वो मेरे बच्चों की उम्र के हैं। अगर उन्हें मुझ पर भरोसा नहीं था, तो उन्होंने पहले मुझसे इस मामले को संभालने के लिए क्यों कहा? मैं लंबे समय से जानता हूं कि अभिषेक मुझ पर भरोसा नहीं करते, लेकिन वे इस तरह मुझ जैसे वरिष्ठ वकील का अपमान नहीं कर सकते। क्या मैं कोई कूड़ेदान हूं?'
लोकप्रियता खत्म होने का दावा
उन्होंने कहा, 'उन्हें अभी भी समझ नहीं आ रहा है कि जनता और पार्टी कार्यकर्ता उन्हें पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने पार्टी को बर्बाद कर दिया है। उनकी वजह से मुझे भी 'चोर' ब्रांड किया जा रहा है। मैं 'कामाक स्ट्रीट' (अभिषेक बनर्जी का कार्यालय) का कोई अदना कार्यकर्ता नहीं हूं जो इस अहंकार को सहन करूंगा।' कल्याण बनर्जी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले भी ममता बनर्जी को पार्टी के 'नंबर-2' के इस व्यवहार और आचरण के बारे में सचेत किया था, लेकिन उस पर कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
पार्टी छोड़ने के दिए संकेत
उन्होंने कहा, 'वह दीदी के खून के रिश्तेदार हो सकते हैं, लेकिन हम लोगों ने भी पिछले 40-45 वर्षों से पार्टी के वफादार सिपाहियों की तरह उनके भाइयों के रूप में काम किया है। मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगा। इस बेहद कठिन समय में भी मैं ममता बनर्जी के साथ खड़ा रहा, और मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है? अगर यही स्थिति रही, तो मेरे लिए पार्टी में बने रहना असंभव होगा।'
वकील पुत्र हुए नाराज
वकील शीर्षाण्य बनर्जी ने कहा, '2 जून से मामले को देख रहे थे ताकि अभिषेक को कुछ राहत मिले। कल रात 12:50 को बताया गया कि कोई और वकील रहेंगे मैटर में जो कल्याण बनर्जी से जूनियर हैं। यह बात हमने कल्याण बनर्जी को बता दिया है। हमारे पेशे का अपना कुछ शिष्टाचार है। जो सीनियर होते हैं वही मैटर की अगुवाई करते हैं। तो अभिषेक ने फैसला किया है कि कोई और वकील रहेगा। तो वकील के तौर पर हमने भी फैसला किया है कि उनके मैटर में नहीं रहेंगे।'
उन्होंने कहा, 'हम लोग प्रोफेशनल हैं और पेशेवर व्यक्ति का सम्मान अधिकार होता है। अगर वह सम्मान नहीं दे पाएंगे, तो पेशेवर भी उनके साथ नहीं रहेंगे। आज अगर उन्हें लगे कि जो लोग के ऊपर वह भरोसा रख रहे हैं, वो उनके साथ रहेंगे तो वह गलत सोच रहे हैं। उन्हें गलतफहमी है।'
जमकर जताई नाराजगी
शीर्षाण्य ने कहा, 'उनके राष्ट्रीय महासचिव बनने से पहले मैं वकील हूं। मैं उनके लिए वकील नहीं बना हूं। वकील के तौर पर मेरा भी कुछ आत्मसम्मान है। अगर उस आत्मसम्मान को कोई ठेस पहुंचाएगा तो मेरा भी अधिकार है उनका मैटर नहीं करने का। वह जो भी हों, मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरा जो काला कोट है, काला गाऊन है। वो पहचान है।'
20 सांसद टूट सकते हैं
शुक्रवार को ही 19 सांसदों की लिस्ट सामने आई है, जिन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को अपना समर्थन पत्र सौंपा। खास बात है कि इनमें ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार, माला रॉय समेत कई नेताओं के नाम शामिल हैं।
विवाद सुलझने की उम्मीद
पार्टी सांसद कीर्ति आजाद ने उम्मीद जताई है कि कल्याण बनर्जी की नाराजगी जल्द दूर हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'कल्याण बनर्जी बहुत इमोशनल हैं। वह दीदी के साथ बुरे समय में भी रहे हैं। वह कभी भी पीठ में छुरा नहीं मार सकते।'
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लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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