Hindi NewsIndia Newsis it not encroaching upon the right of state Why CJI BR Gavai slams ED, halts money laundering probe against TASMA
ये राज्य के अधिकार पर हमला है या नहीं? गरमागरम बहस के बीच ED पर बिदके CJI; जांच पर लगा दी रोक

ये राज्य के अधिकार पर हमला है या नहीं? गरमागरम बहस के बीच ED पर बिदके CJI; जांच पर लगा दी रोक

संक्षेप: अदालत ने इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच पर तब तक के लिए रोक लगा दी, जब तक कि शीर्ष अदालत धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों से संबंधित एक समीक्षा याचिका पर फैसला नहीं कर लेती।

Tue, 14 Oct 2025 07:36 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार बनाम प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई कर रही थी। दरअसल, ED 1000 करोड़ रुपए के कथित घोटाले के सिलसिले में तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) के अधिकारियों के ठिकानों पर रेड मार रही थी, जिसके खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटायाया था और ईडी की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।

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तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि यह TASMAC का मामला है, जो सरकारी कंपनी है। सिब्बल ने ED की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी सरकारी कंपनी पर छापेमारी कैसे हो सकती है? उन्होंने अदालत को बताया कि कंपनी के प्रबंध निदेशकों पर छापेमारी हुई है। यहां तक कि प्रवर्तन निदेशालय ने सरकारी कंपनी के कंप्यूटर वगैरह जब्त कर लिए हैं, जो चौंकाने वाला है।

सिब्बल के क्या तर्क?

सिब्बल ने कहा, "एक बार FIR हो जाए...ECIR हो जाए... तो यह मामला पल भर में बंद हो सकता है। हमें तय करना होगा कि क्या करना है और क्या नहीं... प्रवर्तन निदेशालय बेमतलब परेशान कर रहा है।" इसके जवाब में ED की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने अदालत को बताया कि कुल 47 FIR दर्ज हुए हैं, बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं... हम पूर्वनिर्धारित अपराधों पर और दर्ज अपराधों पर काम कर रहे हैं... कंपनी ने इन सभी अधिकारियों पर पैसा कैसे बहाया है, इसकी जांच कर रहे हैं और ये प्रक्रिया जांच का जरिया है। इसके साथ ही ASG ने कहा कि वहां बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।

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कानून-व्यवस्था पर किसका नियंत्रण है?

इस पर CJI गवई ने ASG से पूछा कि क्या स्थानीय पुलिस इस मामले की जांच नहीं कर सकती है? तभी सिब्बल ने कहा कि राज्य पुलिस इस मामले में कदम उठा रही है और जांच कर रही है। तभी ASG ने फिर कहा कि यह बड़े पैमाने का भ्रष्टाचार है। इस पर CJI गवई बिदक गए और पूछ डाला,"फिर संघीय ढांचे का क्या होगा? कानून-व्यवस्था पर किसका नियंत्रण है?"

ये राज्य के अधिकार का अतिक्रमण नहीं है?

बार एंड बेंच के मुताबिक, इसी गरमागरम बहस के बीच एएसजी ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है। इस पर सिब्बल ने अदालत को बताया कि अब तक 60 घंटे की तलाशी ली जा चुकी है और 42 में से 36 FIR बंद हो चुकी हैं। इस पर CJI गवई ने ASG से पूछा, “क्या यह किसी मामले की जाँच करने के राज्य के अधिकार का अतिक्रमण नहीं है? जब भी आपको संदेह होगा कि राज्य जांच नहीं कर रहा है, तो आप खुद वहां पहुंच जाएंगे?”

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मनी लॉन्ड्रिंग की जांच पर लगा दी रोक

इसके बाद अदालत ने इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच पर तब तक के लिए रोक लगा दी, जब तक कि शीर्ष अदालत धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों से संबंधित एक समीक्षा याचिका पर फैसला नहीं कर लेती। बता दें कि मई में भी शीर्ष अदालत ने TASMAC के मुख्यालय पर छापेमारी के लिए ED की आलोचना की थी और TAMSAC के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई और मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर रोक लगा दी थी। इसने तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर हस्तक्षेप किया था जिसमें मद्रास हाई कोर्ट द्वारा ED को मनी लॉन्ड्रिंग जांच जारी रखने की अनुमति देने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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