'बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही दुनिया', ईरानी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को धन्यवाद भी दिया
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया इस समय बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही है। कई देशों के बीच तनाव बढ़ा है और सामान बनाने व पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। उन्होंने US और इजरायल पर प्रतिबंध लगाने का आरोप लगाया।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रिक्स को मजबूत करने के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स बैठक से पहले BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित किया। पेजेश्कियन ने कहा कि भारत ने इस संगठन के सहयोग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने भारत सरकार और यहां के लोगों को बैठक की मेजबानी के लिए भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की असली ताकत सिर्फ उसके सदस्य देशों की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में नहीं है। इसकी ताकत तब सामने आएगी, जब ये देश आपस में कारोबार, निवेश और मिलकर वित्त जुटाने का काम बढ़ाएंगे।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया इस समय बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही है। कई देशों के बीच तनाव बढ़ा है और सामान बनाने व पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और कड़े प्रतिबंध लगाने का आरोप लगाया। पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान पिछले कई साल से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, लेकिन हाल के महीनों में हालात और खराब हुए हैं। उनके मुताबिक, इस हमले में जान-माल का नुकसान हुआ है और इससे यह साफ हुआ है कि किसी देश की आर्थिक सुरक्षा उसकी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा से अलग नहीं हो सकती।
मसूद पेजेश्कियन ने क्या रखी मांग
मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि जब व्यापार, ऊर्जा या पैसे से जुड़ी व्यवस्था पर राजनीतिक या सैन्य दबाव पड़ता है, तो उसका असर सिर्फ एक देश तक नहीं रहता। इससे पूरे इलाके और दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पेजेश्कियन ने कहा कि ब्रिक्स को ऐसे देशों के लिए मजबूत आर्थिक व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, ताकि कोई भी देश किसी दूसरे देश के वैध कारोबार को रोक न सके। उन्होंने आपसी कारोबार में सदस्य देशों की अपनी मुद्राओं के इस्तेमाल पर जोर दिया। उनका कहना था कि इसके साथ ऐसी व्यवस्था भी बनानी होगी, जिससे मुद्रा की कीमत में होने वाले बदलाव से कारोबारियों को ज्यादा नुकसान न हो।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था कुछ गिनी-चुनी मुद्राओं पर ज्यादा निर्भर है। इससे राजनीतिक संकट के समय कारोबार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने ब्रिक्स के नए विकास बैंक से सदस्य देशों में सड़क, बिजली और ऊर्जा जैसी परियोजनाओं के लिए स्थानीय मुद्रा में कर्ज देने और निजी निवेश को बढ़ावा देने वाली गारंटी व्यवस्था बनाने की मांग की। पेजेश्कियन ने ब्रिक्स के देशों के बीच कारोबार को और आसान बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों में चल रही व्यापार व्यवस्था को एक-दूसरे से जोड़ना होगा। इसके लिए सीमा शुल्क की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और सामान के आयात-निर्यात में लगने वाली औपचारिकताओं को कम करने की जरूरत है।


