ईरान युद्ध से देश में LPG का संकट, केंद्र सरकार बोली- राज्यों को अतिरिक्त केरोसीन दिया
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच देश में लगातार एलपीटी की किल्लत की खबरें आ रही हैं। ऐसे में पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी की संतोषजनक उपलब्धता का भरोसा दिलाया है। इसके साथ ही कहा कि कई राज्यों को अतिरिक्त केरोसीन दिया है।

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत में घरेलू रसोई गैस एलपीजी की किल्लत की खबरें आ रही हैं। इन खबरों और जनता के सवालों का जवाब गुरुवार को सरकार की तरफ से दिया गया। सरकार ने बताया कि देश में एलपीजी की उपलब्धता संतोषजनक रूप से बनी हुई है, किसी भी आपात स्थिति के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों को 40,000 किलोलीटर कैरोसीन उपलब्ध करवाया है। मंत्रालय की तरफ से संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है, लेकिन भारत में ईंधन की उपलब्धता फिलहाल सामान्य हैं।
गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोगों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "घबराहट की वजह से गैस बुकिंग में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। हम नागरिकों से अपील करते हैं कि पैनिक बुकिंग से बचें और इस वैश्विक अनिश्चितता के दौर में जहां संभव हो ईंधन की बचत करें।" उन्होंने कहा कि देश में कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति फिलहाल संतोषजनक है और देश के लगभग 1 लाख पेट्रोल पंपों में कहीं भी ईंधन खत्म होने की स्थिति नहीं हुई है।
भारत में एलपीजी आयात की क्या स्थिति?
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने हालात के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है। इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है, जो कि अभी बंद है। हालांकि, सरकार के हस्तक्षेप के बाद अब भारत का एलपीजी आयात का 70 फीसदी हिस्सा दूसरे समुद्री मार्गों से आ रहा है।
शर्मा ने बताया कि इसके अलावा सरकार ने घरेलू रिफाइनिंग क्षमता को भी बढ़ावा देकर इस संकट के समय में मजबूत सहारा बनाया है। उन्होंने कहा हमारी रिफाइनरियां प्रतिदिन करीब 4.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल प्रोसेस करती हैं। 9 मार्च को एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत यह सभी रिफानरियां एलपीजी के उत्पादन को बढ़ा रही हैं, इससे देश का एलपीजी उत्पादन 28 से बढ़कर 28 फीसदी हो गया है।
उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी ईंधन की कमी नहीं है। देश में लगभग 1 लाख पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और कहीं भी ईंधन खत्म होने की स्थिति नहीं है। लगभग 25,000 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर काम कर रहे हैं। इसके अलावा रोज लगभग 50 लाख गैस सिलेंडर की डिलीवरी हो रही है।
राज्यों को केरोसीन क्यों भेजा?
मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति की वजह से देश के ऊर्जा संसाधनों पर फर्क पड़ा है। पैनिक की स्थिति में नागरिक भी जरूरत से ज्यादा गैस की बुकिंग कर रहे हैं। ऐसे स्थिति में सरकार एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए अन्य ईंधनों के विकल्पों को बढ़ावा दे रही है। इनमें से एक तरीका राज्यों को अधिक केरोसीन देकर और छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा राज्यों को सलाह दी गई है कि रेस्टोरेंट सेक्टर को एक महीने के लिए बायोमास, RDF पेलेट, केरोसीन या कोयले के अस्थायी उपयोग की अनुमति दी जाए।
गौरतलब है कि ईरान युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा संकट बढ़ गया है। भारत का ज्यादातर ऊर्जा व्यापार इन्हीं देशों से होता है। इसकी वजह से इसका प्रभाव भारत पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सरकार लगातार दूसरे विकल्पों की तलाश कर रही है। कुछ दिनों पहले ही सरकार ने रिफाइनरियों से एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा था, जिसका फायदा देश को मिला भी। इसके अलावा होर्मुज के रास्ते युद्ध शुरू होने के बाद पहला तेल टैंकर भारत पहुंचा है, जो अभी मुंबई के जवाहर द्वीप पोर्ट पर खड़ा हुआ है।


