ईरान-अमेरिका हमारे दोस्त, पर दुश्मन बाजी मार गया, ताकते रह गए PM मोदी; विदेश नीति पर राहुल गांधी का तीखा तंज
राहुल गांधी ने कहा कि अगर भारत अपनी ताकत समझता और अगर हमारे पास इंदिरा गांधी जैसा मजबूत नेता होता, तो यह भारत के लिए दुनिया का सबसे बड़ा मौका होता। लेकिन हुआ क्या? पाकिस्तान बीच में आ गया, और मोदी जी चुपचाप देखते रह गए।
लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला है और उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी विदेश नीति के नाम पर विदेशी नेताओं से सिर्फ गले मिलते हैं। उन्होंने कहा कि पता नहीं उन्हें यह बात कैसे घर कर गई कि विदेशी नेताओं से गले मिलना ही विदेश नीति है। रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए गुरुवार को राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान-अमेरिका युद्ध को सुलझाने में एक बड़ा मौका गंवा दिया।
राहुल ने कहा कि ईरान और अमेरिका दोनों हमारे मित्र देश हैं। जब इन दोनों के बीच जंग शुरू हुई तो पीएम मोदी ने उसे सुलझाने की कोई कोशिश नहीं की बल्कि जब हमारा दुश्मन मुल्क पाकिस्तान उसे सुलझाने को आगे बढ़ा और दोनों के बीच मध्यस्थ बनकर उभरा, तब पीएम मोदी बगलें झांकते रहे। राहुल ने कहा कि भारत ने ईरान और US के साथ अपने रिश्तों का इस्तेमाल करने का एक "बड़ा मौका" गंवा दिया।
अगर इंदिरा गांधी जी जैसा नेतृत्व होता, तो…
केंद्र की मोदी सरकार की विदेश नीति पर जमकर निशाना साधते हुए गांधी ने आरोप लगाया कि भारत महीनों पुराने संघर्ष को खत्म करने में कोई अहम भूमिका निभाने के लिए ईरान और US के साथ अपने रिश्तों का फायदा उठाने में नाकाम रहा। उन्होंने कहा, उन्होंने कहा, “अमेरिका-ईरान युद्ध हुआ। ऐसे में अगर इंदिरा गांधी जी जैसा नेतृत्व होता, तो हमारे पास सबसे बड़ा अवसर होता क्योंकि ईरान हमारा पुराना दोस्त है, अमेरिका और रूस भी हमारा दोस्त है तो हम इनकी आपस में दोस्ती करा सकते थे। लेकिन पाकिस्तान हमारी जगह उठाकर ले गया और नरेंद्र मोदी देखते रह गए।”
ईरान भारत का पुराना दोस्त
विपक्ष के नेता ने जोर देकर कहा कि ईरान भारत का पुराना दोस्त है, जबकि रूस और US भी भारत के दोस्त हैं। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली इन रिश्तों का इस्तेमाल युद्ध को सुलझाने की कोशिशों में खुद को ज़्यादा जरूरी बनाने के लिए कर सकती थी। उन्होंने कहा, "ईरान हमारा पुराना दोस्त है, और रूस और अमेरिका हमारे दोस्त हैं लेकिन पाकिस्तान ने हमारी जगह ले ली।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए सभी देशों के साथ संबंध रखने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता देश की राजनीतिक संरचना को मजबूत करने और अपने समर्थक कारोबारी समूहों से आर्थिक सहयोग लेने तक सीमित हो गयी है।
नई दिल्ली ने दोनों पक्षों के साथ कूटनीतिक जुड़ाव बनाए रखा
बता दें कि ईरान-अमेरिका युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ जब अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले किए। इससे पश्चिम एशिया में एक बड़ा क्षेत्रीय संघर्ष शुरू हो गया और स्ट्रेटेजिक रूप से ज़रूरी होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग में रुकावट आई। महीनों की लड़ाई के बाद, वॉशिंगटन और तेहरान ने अप्रैल में एक टेम्पररी सीज़फ़ायर किया, जिसमें पाकिस्तान ने बीच-बचाव में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, शांति वार्ता फिर से शुरू करने की कोशिशें तब से रुकी हुई हैं। दूसरी तरफ, ईरान और US अभी भी होर्मुज स्ट्रेट और बैन जैसे मुद्दों पर बंटे हुए हैं। भारत इस जंग में सीधे तौर पर कोई पार्टी या मध्यस्थ की भूमिका में नहीं रहा है। नई दिल्ली ने दोनों पक्षों के साथ कूटनीतिक जुड़ाव बनाए रखा है और बार-बार बातचीत और तनाव कम करने की दोनों पक्षों से अपील की है।


